लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों के बाद बड़ा एक्शन, हर परत की मंजूरी जरूरी; मांगे 21 सुझाव - lucknow kanpur expressway flaws strict layer wise approval rules for highways construction
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों के बाद बड़ा एक्शन, हर परत की मंजूरी जरूरी; मांगे 21 सुझाव लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने हाईवे निर्माण में एआइ-एमसी तकनीक के सफल उपयोग के ल…

सौजन्य से:- Jagran
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों के बाद बड़ा एक्शन, हर परत की मंजूरी जरूरी; मांगे 21 सुझाव
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में खामियों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने हाईवे निर्माण में एआइ-एमसी तकनीक के सफल उपयोग के लिए एसओपी बनाने की तैयारी की है।
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ऑटोमेटेड एंड इंटेलीजेंट मशीन-एडेड कंस्ट्रक्शन (एआई-एमसी) तकनीक के उपयोग के बावजूद लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सामने आई खामियों को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के दिशा-निर्देशों के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बकायदा इस तकनीक के सफल उपयोग के लिए एसओपी बनाने की तैयारी कर ली है।
जिस प्रारूप पर हितधारकों से 21 दिन में सुझाव मांगे गए हैं, उसमें इस बिंदु को भी शामिल किया गया है कि निर्माण की निगरानी के नियुक्त इंडीपेंडेंट इंजीनियर को एआइ-एमसी के डाटा की जांच के साथ ही किसी भी परत को स्वीकृति दी जाएगी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की खामियों के बाद मंत्रालय का कदम
अब 20 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाले प्रत्येक राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में एआइ-एमसी के इस्तेमाल का निर्णय लिया जा चुका है। सरकार की मंशा है कि जिस तरह की कमियां पायलट प्रोजेक्ट यानी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में सामने आई हैं, वह भविष्य में सामने न आएं।
इसे देखते हुए ही बीते दिनों एनएचएआइ ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए। अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अपने पोर्टल पर एसओपी का प्रारूप भी अपलोड कर दिया है।
इसमें प्रस्तावित किया गया है कि जीपीएस-एडेड मोटर ग्रेडर, इंटेलीजेंट कंपेक्शन रोलर, सिंगल ड्रम, वाइब्रेटरी रोलर आदि के प्रयोग के लिए ठेकेदार को साइट कंट्रोल पाइंट और अस्थायी बेंचमार्क स्थापित करने होंगे।
इंजीनियर हर निर्माण परत की जांच कर देंगे स्वीकृति
एम्बार्कमेंट, सबग्रेड, सब-बेस और बेस लेयर के लिए डिजिटल थ्रीडी माडल बनाकर अथारिटी के इंजीनियर और स्वतंत्र इंजीनियर से उसे स्वीकृत कराना होगा। स्वीकृत ड्राइंग में बदलाव होने पर सात दिन के अंदर माडल में भी बदलाव कर स्वीकृत कराना होगा।
मंत्रालय ने प्रस्ताव किया है कि निर्माण के दौरान एअाइ-एमसी को लागू करने, उसके परिणाम या निष्कर्ष को लेकर पूरे ब्योरे के साथ वचन-पत्र तैयार करना होगा। उसकी जांच प्राधिकरण करेगा।
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