21वीं सदी में उत्तर प्रदेश में 26 वर्षों में दूसरी बार अगस्त माह में सामान्य से अधिक वर्षा, बनारस में 35 वर्षों का रिकार्ड टूटा - uttar pradesh receives above normal rainfall in august for second time in 26 years
21वीं सदी में उत्तर प्रदेश में 26 वर्षों में दूसरी बार अगस्त माह में सामान्य से अधिक वर्षा, बनारस में 35 वर्षों का रिकार्ड टूटा उत्तर प्रदेश में अगस्त माह में सामान्य से 24% अधिक वर्षा हुई, जो 26 वर्षों में दूसरी सर्वाधि…

सौजन्य से:- jagran.com
21वीं सदी में उत्तर प्रदेश में 26 वर्षों में दूसरी बार अगस्त माह में सामान्य से अधिक वर्षा, बनारस में 35 वर्षों का रिकार्ड टूटा
उत्तर प्रदेश में अगस्त माह में सामान्य से 24% अधिक वर्षा हुई, जो 26 वर्षों में दूसरी सर्वाधिक है। वाराणसी ...और पढ़ें
HighLights
- उत्तर प्रदेश में अगस्त में 26 वर्षों का रिकॉर्ड टूटा।
- वाराणसी में 35 वर्षों की सर्वाधिक वर्षा दर्ज की गई।
- किसानों को राहत, जलस्तर में सुधार, सूखे से बचाव।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। इस वर्ष प्रदेश में अगस्त माह के दौरान 235.5 मिमी के दीर्घकालिक औसत के सापेक्ष 291.3 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से 24% अधिक है। यह वर्षा बीते 26 वर्षों में, यानी चालू 21वीं सदी में वर्ष 2018 में हुई 293.1 मिमी वर्षा के बाद अब तक की सर्वाधिक वर्षा है।
वाराणसी में भी इस बार अगस्त माह तक 35 वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया है, जहां अब तक 615.1 मिमी के सापेक्ष 633.3 मिमी वर्षा हुई है, जो तीन प्रतिशत अधिक है। सावनी मेघों ने 27 अगस्त तक बीते 10 वर्षों में अगस्त माह में सर्वाधिक वर्षा का रिकॉर्ड बना लिया था।
इससे पूर्व इतनी अधिक वर्षा वर्ष 2016 में हुई थी। इस बार 27 अगस्त तक औसत 584 मिमी के सापेक्ष औसतन 591.9 मिमी वर्षा हुई, जो औसत वर्षा से एक प्रतिशत अधिक है।
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इस वर्ष की वर्षा ने न केवल किसानों के लिए राहत का काम किया है, बल्कि जल स्तर में भी सुधार लाने में मदद की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष की वर्षा से सूखे के संकट से निपटने में सहायता मिलेगी।
अगस्त माह में हुई इस वर्षा ने नदियों और जलाशयों में जल स्तर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे कृषि क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि की संभावना है।
हालांकि, अत्यधिक वर्षा के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव की समस्या भी उत्पन्न हुई है। प्रशासन ने इस स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने की तैयारी की है। माना जा रहा है कि मानसून के बचे हुए अगले तीस दिन भी इसी प्रकार निकले तो बारिश नुकसानदायक भी सिद्ध हो सकती है।
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इस वर्ष की वर्षा ने मौसम विज्ञानियों को भी आश्चर्यचकित किया है, क्योंकि यह सामान्य से अधिक वर्षा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि आने वाले दिनों में भी वर्षा की संभावना बनी रहेगी, जिससे किसानों को अपनी फसलों के लिए और अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।
अगस्त माह में हुई वर्षा ने प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी उजागर किया है। यह वर्षा न केवल जल संकट को कम करने में सहायक होगी, बल्कि कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा देगी। इस वर्ष की वर्षा ने प्रदेश के लिए एक नई उम्मीद जगाई है, जिससे आने वाले समय में कृषि और जल संसाधनों के प्रबंधन में सुधार की संभावना है।
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