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लखनऊ में 208 जर्जर इमारतें हादसे के मुहाने पर, नोटिस के बाद भी नहीं खाली हुए मकान

लखनऊ में 208 जर्जर इमारतें हादसे के मुहाने पर, नोटिस के बाद भी नहीं खाली हुए मकान लखनऊ में जर्जर भवनों का खतरा कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गोलागंज स्थित महमूदाबाद ट्रस्ट बिल्डिंग की दीवार कुछ द…

ABP News के अनुसार7 सितंबर 2026 को 07:31 am बजे
लखनऊ में 208 जर्जर इमारतें हादसे के मुहाने पर, नोटिस के बाद भी नहीं खाली हुए मकान

सौजन्य से:- ABP News

लखनऊ में 208 जर्जर इमारतें हादसे के मुहाने पर, नोटिस के बाद भी नहीं खाली हुए मकान

लखनऊ में जर्जर भवनों का खतरा कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गोलागंज स्थित महमूदाबाद ट्रस्ट बिल्डिंग की दीवार कुछ दिन पहले भरभरा कर गिर गई थी.

लखनऊ में दिल्ली जैसी इमारत ढहने की घटना का खतरा मंडरा रहा है. नगर निगम के मुताबिक शहर में 208 ऐसी जर्जर इमारतें चिन्हित की गई हैं, जो कभी भी हादसे का कारण बन सकती हैं. इन भवनों में रहने वाले लोगों को नगर निगम की ओर से नोटिस भी दिया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद न तो लोग मकान खाली कर रहे हैं और न ही भवन को सुरक्षित कराने की दिशा में कोई कदम उठाया जा रहा है.

नगर निगम के अवर अभियंता विकास सिंह के मुताबिक, जर्जर भवनों में रहने वाले लोगों को नोटिस देकर सावधान किया गया है. हालांकि, नगर निगम की कार्रवाई फिलहाल नोटिस देने तक ही सीमित है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर किसी जर्जर इमारत के अचानक गिरने से बड़ा हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?

पुराने लखनऊ में सबसे ज्यादा खतरा

जर्जर भवनों की संख्या पुराने और सघन इलाकों में अधिक है. इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुराने मकान हैं, जिनमें किराएदारी, मालिकाना हक और बंटवारे को लेकर विवाद भी चल रहे हैं. यही वजह है कि कई भवनों की मरम्मत या उन्हें खाली कराने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है.

लालकुआं, मंडी, कैसरबाग, अमीनाबाद, गड़बड़झाला, शिवाजी मार्ग, नजरबाग, बशीरतगंज, मौलवीगंज, उदयगंज, बर्फखाना, गोलागंज, गणेशगंज, रिवर बैंक कॉलोनी, नरही बाजार, नवल किशोर रोड, कटरा मकबूलगंज, वजीरगंज, आर्यनगर, यहियागंज, तुलसीदास मार्ग, राजेंद्र नगर, चारबाग, पानदरीबा, पांडेयगंज, ऐशबाग, पाटानाला, नादान महल रोड, मोतीनगर और कुंडरी रकाबगंज समेत कई इलाकों में जर्जर भवन मौजूद हैं.

इसके अलावा महानगर, बनारसी टोला, अब्दुल अजीज रोड, चौक, कश्मीरी मोहल्ला, हुसैनाबाद, अशर्फाबाद, अकबरी गेट और त्रिवेणीनगर में भी ऐसे भवन बताए गए हैं.

पांच दिन पहले गिर गई थी महमूदाबाद ट्रस्ट बिल्डिंग की दीवार

लखनऊ में जर्जर भवनों का खतरा कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गोलागंज स्थित महमूदाबाद ट्रस्ट बिल्डिंग की दीवार कुछ दिन पहले भरभरा कर गिर गई थी. गनीमत रही कि जिस समय दीवार गिरी, उस वक्त सड़क पर कोई मौजूद नहीं था और बड़ा हादसा टल गया.

सघन आबादी वाले इलाकों में बड़ा खतरा

इन इलाकों में आबादी काफी घनी है और कई जर्जर भवनों में आज भी परिवार रह रहे हैं. ऐसे में अगर किसी भवन के अचानक गिरने की घटना होती है तो बड़ी संख्या में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है. दिल्ली में हाल में सामने आई इमारत ढहने की घटना के बाद लखनऊ के इन 208 जर्जर भवनों को लेकर नगर निगम की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ नोटिस देने से खतरा खत्म नहीं होगा. प्रशासन को ऐसे भवनों का दोबारा सर्वे कराकर उन्हें खाली कराने, मरम्मत कराने या जरूरत पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करनी चाहिए.

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