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यूपी चुनाव 2027 से पहले RLD को बड़ा झटका, जयंत चौधरी के करीबी ने छोड़ी पार्टी

यूपी चुनाव 2027 से पहले RLD को बड़ा झटका, जयंत चौधरी के करीबी ने छोड़ी पार्टी UP Election 2027: राष्ट्रीय लोकदल को यूपी चुनाव 2027 से पहले बड़ा झटका लगा है. पार्टी की यूपी इकाई के अध्यक्ष रामाशीष राय ने इस्तीफा दे दिया ह…

abplive.com के अनुसार7 अगस्त 2026 को 10:18 am बजे
यूपी चुनाव 2027 से पहले RLD को बड़ा झटका, जयंत चौधरी के करीबी ने छोड़ी पार्टी

सौजन्य से:- abplive.com

यूपी चुनाव 2027 से पहले RLD को बड़ा झटका, जयंत चौधरी के करीबी ने छोड़ी पार्टी

UP Election 2027: राष्ट्रीय लोकदल को यूपी चुनाव 2027 से पहले बड़ा झटका लगा है. पार्टी की यूपी इकाई के अध्यक्ष रामाशीष राय ने इस्तीफा दे दिया है.

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल को बड़ा झटका लगा है. रालोद की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रामाशीष राय ने पार्टी का दामन छोड़ दिया है. रामाशीष राय के पार्टी छोड़ने से जयंत चौधरी को झटका लग सकता है. केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को भेजे एक पत्र में राय ने कहा- राष्ट्रीय लोकदल, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व मुझे सौंपने के लिए मैं आपका हृदय से आभारी हूं. इस दायित्व का निर्वहन करते हुए मैंने अपनी सामर्थ्य एवं क्षमता के अनुसार संगठन को सुदृढ़ बनाने का प्रयास किया, प्रदेश के विभिन्न जनपदों का व्यापक दौरा किया.

उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित किया तथा संगठन के विस्तार और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य किया.मैं राजनीति में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 1974-75 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर जुड़ा था. उस समय भ्रष्टाचार, महँगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण तथा शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे प्रश्न राष्ट्रीय चिंता के विषय थे. लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान करते हुए व्यवस्था परिवर्तन का जो स्वप्न देश के सामने रखा था, वह आज भी अधूरा प्रतीत होता है.

सामाजिक विभाजन और जातीय उन्माद को बढ़ावा दे रहे कुछ लोग- राय

राय ने लिखा कि भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है. समाज को जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. किसान अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए संघर्षरत है, जबकि नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा जनमानस में असंतोष को जन्म दे रही है. देश के महापुरुषों ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और बंधुत्व की भावना को मजबूत करने के लिए 'जाति तोड़ो, समाज जोड़ो' का संदेश दिया था. दुर्भाग्यवश आज सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग भी उच्च स्थानों पर हैं जो सामाजिक विभाजन और जातीय उन्माद को बढ़ावा दे रहे हैं.

उन्होंने लिखा कि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित- तीनों के लिए घातक है. भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी राजनीति और चुनावों में बढ़ते धनबल के प्रभाव को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया था. आज उनकी आशंकाएँ काफी हद तक सत्य सिद्ध होती दिखाई दे रही हैं. राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता के स्थान पर आर्थिक शक्ति और परिवारवाद का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को निरंतर क्षति पहुँच रही है. यह स्थिति देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए चिंताजनक है. संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र आज खतरे में है. व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश, इन्ही वैचारिक एवं नैतिक करणों से, में राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना त्यागपत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ.

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