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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027ः यूपी में ''ब्राह्मण प्रेम''?, अखिलेश यादव, ब्रजेश पाठक और मायावती में चुनावी जंग?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027ः यूपी में ''ब्राह्मण प्रेम''?, अखिलेश यादव, ब्रजेश पाठक और मायावती में चुनावी जंग? By सतीश कुमार सिंह | Updated: August 8, 2026 11:59 IST2026-08-08T11:56:05+5:302026-08-08T11:59:10+5:30 U…

Lokmat News Hindi के अनुसार8 अगस्त 2026 को 07:18 am बजे
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027ः यूपी में ''ब्राह्मण प्रेम''?, अखिलेश यादव, ब्रजेश पाठक और मायावती में चुनावी जंग?

सौजन्य से:- Lokmat News Hindi

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027ः यूपी में ''ब्राह्मण प्रेम''?, अखिलेश यादव, ब्रजेश पाठक और मायावती में चुनावी जंग?

By सतीश कुमार सिंह | Updated: August 8, 2026 11:59 IST2026-08-08T11:56:05+5:302026-08-08T11:59:10+5:30

Uttar Pradesh Assembly Elections 2027: पांच अगस्त को समाजवादी नेता दिवंगत जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि पीडीए में 'पी' का मतलब 'पंडित' है।

लखनऊः भगवान हनुमान और सुग्रीव के वेश में लोगों के साथ समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के खास PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फ़ॉर्मूले को एक नया अर्थ दिया। इस हफ़्ते की शुरुआत में लखनऊ में एक ब्राह्मण सम्मेलन को संबोधित करते हुए, अखिलेश ने कहा कि PDA में 'P' का मतलब 'पंडित' भी होता है और उन्होंने BJP सरकार पर ब्राह्मणों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। अब तक का सबसे साफ़ संकेत था कि SP, जो लंबे समय से अपने मुस्लिम-यादव (M-Y) वोट बैंक के लिए जानी जाती रही है।

अब BJP के सबसे वफ़ारदार वोट बैंकों में से एक को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है। 5 अगस्त को की गई यह पहल कोई अचानक या बिना सोचे-समझे उठाया गया कदम नहीं है। यह कदम अखिलेश के मंदिर की राजनीति को अपनाने, साधु-संतों से मुलाकातों, राम मंदिर चंदे में कथित चोरी के मुद्दे पर आलोचना, बार-बार सनातन धर्म का ज़िक्र करना रणनीति का हिस्सा है।

यादव परिवार के गढ़ इटावा में केदारेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण जैसे कामों के बीच उठाया गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं, ऐसे में "पिछड़े वर्गों" की राजनीति पर बनी पार्टी SP अब ब्राह्मणों को लुभाने पर बहुत ज़्यादा ज़ोर दे रही है। SP की इस नई रणनीति के केंद्र में है UP का जातिगत गणित, जातियों का झुकाव किस तरफ रहा है।

बहुजन समाज पार्टी का कमज़ोर होना और पिछले एक दशक में BJP का राजनीतिक दबदबा है। हिंदुत्व के नैरेटिव को बीजेपी के हवाले करने के बजाय अखिलेश उसी वैचारिक मैदान पर चुनाव लड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित दिख रहे हैं। अखिलेश की यह पहल UP विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आई है।

‘‘ब्राह्मणों के उत्पीड़न’’ के आरोप पर पाठक का अखिलेश पर पलटवार, कहा: हितैषी होने का स्वांग न रचें

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ''भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा ब्राह्मणों को निशाना बनाए जाने'' संबंधी अखिलेश यादव की टिप्पणी पर शनिवार को पलटवार किया और कहा कि सपा प्रमुख ब्राह्मण समाज का हितैषी होने का ''स्वांग'' रच रहे हैं। पाठक ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं लेकिन तथ्यों का जवाब तथ्यों से दिया जाना चाहिए, न कि भ्रम, कटुता और निराधार आरोपों से।

उन्होंने अपने आधिकारिक 'एक्स' खाते पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संबोधित एक लंबी 'पोस्ट' में कहा, ''राजनीति में विचारों का उत्तर विचारों से दिया जाता है, व्यक्तिगत कटुता और असत्य आरोपों से नहीं।'' उप मुख्यमंत्री ने समाजवादी चिंतक और नेता दिवंगत डॉ. राममनोहर लोहिया का जिक्र करते हुए सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाया।

उन्होंने लिखा, ''डॉ. लोहिया परिवारवाद के सबसे बड़े विरोधी थे। वह कहते थे, 'जो परिवार से सटेगा, वह समाज से कटेगा।' उनका मानना था कि जब परिवार सबसे शक्तिशाली हो जाता है, तब समाज कमजोर हो जाता है।'' पाठक ने कहा, ''आज जो लोग लोहिया के नाम पर राजनीति करते हैं, उन्होंने उनके विचारों को सबसे पहले त्यागा है।

लोहिया यदि आज होते, तो परिवारवाद को राजनीति का आधार बनाने वालों को कठोर सवालों के कटघरे में सबसे पहले खड़ा करते।'' इससे पहले, अखिलेश यादव ने दिवंगत समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर सपा के 'प्रबुद्ध सम्मेलन' (ब्राह्मण सम्मेलन) में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

पाठक ने यादव पर पलटवार करते हुए कहा, ''आप आज ब्राह्मण समाज के हितैषी होने का स्वांग रच रहे हैं, जबकि आपके मुख से 'मिश्राजी कुछ तो शर्म करो' जैसा वाक्य और पत्रकारों की जाति पूछना समाज की छाती में आज भी बरछी की तरह चुभता है। आपका पूरा राजनीतिक विमर्श एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमता है।"

उन्होंने कहा कि समाज का उत्थान किसी एक परिवार को सत्ता दिलाने से नहीं, बल्कि हर वर्ग को समान अवसर, न्याय और सम्मान देने से होता है। पाठक ने कहा, ''जहां तक मेरे सार्वजनिक जीवन का सवाल है, उसका मूल्यांकन जनता करती है। मैंने संगठन, संविधान और जनसेवा को हमेशा सर्वोपरि रखा है।

व्यक्तिगत आरोप, अपशब्द और दुष्प्रचार न सत्य बदल सकते हैं और न ही जनता का विश्वास।'' उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति 'राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि और अंत्योदय' पर आधारित है जबकि परिवारवादी राजनीति का उद्देश्य सत्ता को एक परिवार तक सीमित रखना है तथा जनता इस अंतर को अच्छी तरह समझती है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ब्राह्मण समुदाय को लुभाने की कोशिश करते हुए बुधवार को कहा कि सपा के 'पीडीए' में पंडित भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में सपा की सरकार बनने पर ब्राह्मण समुदाय को बराबर का स्थान और सम्मान दिया जाएगा।

अखिलेश ने सपा नेता जनेश्वर मिश्र की जयंती पर यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित 'ब्राह्मण सम्मेलन' के दौरान राज्य सरकार पर विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं, ब्राह्मणों और शंकराचार्य समेत धार्मिक नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गोमती नगर स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी।

जिसके कारण पार्टी को इसका आयोजन अपने कार्यालय परिसर में करना पड़ा। अखिलेश ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरफ इशारा करते हुए कहा, "वे लोग जब से पीडीए से हारे हैं, तब से पीडीए की नयी-नयी परिभाषा गढ़ रहे हैं, लेकिन वे भूल गए हैं कि 'पीडीए' में 'पी' तो 'पंडित' का ही 'शॉर्ट फॉर्म' है।"

उन्होंने कहा, "जितनी ही पीड़ा बढ़ाओगे, पीडीए उतना ही मजबूत दिखाई देगा।" पीडीए सपा प्रमुख का गढ़ा एक नारा है, जिसका आमतौर पर अर्थ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग से लगाया जाता है। अखिलेश ने कानपुर के बिकरू कांड के आरोपी विकास दुबे की कार पलटने और फिर कथित मुठभेड़ में उसके मारे जाने की घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि सरकार ने वह गाड़ी पलटाकर खुद को बचा लिया, क्योंकि अगर गाड़ी न पलटती तो सरकार की सच्चाई सामने आ जाती और वह खुद ही पलट जाती।

उन्होंने सरकार पर ब्राह्मणों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा, "सरकार के लोग हमें और हमारे साथियों को तो मार ही रहे थे, लेकिन अब वे पीडीए के 'पी' के पीछे भी पड़ गए हैं।" अखिलेश ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि पिछली बार ब्राह्मण समाज के कई साथी चुनाव हार गए थे, लेकिन इस बार कोई गलती नहीं होगी।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) के ''ब्राह्मण प्रेम'' पर तीखा प्रहार करते हुए शनिवार को कहा कि सपा अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए ''गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है।''

मायावती ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ''बसपा 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की नीति पर चलने वाली सर्वसमाज-हितैषी आंबेडकरवादी पार्टी है। उत्तर प्रदेश में हमारी चार बार की सरकार भी इसी आधार पर चली है, जबकि सपा अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए जगजाहिर तौर पर गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है।''

उन्होंने सपा के 'पीडीए' फॉर्मूले पर सवाल उठाए। मायावती ने कहा, ''सपा द्वारा प्रचारित पीडीए यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक में पहले 'पी' से पिछड़ा बताया जाता था। लेकिन अब ब्राह्मण समाज को बसपा से तेजी से जुड़ता देख और उसी आधार पर पार्टी उम्मीदवार बनाए जाने से घबराकर सपा ने 'पी' का मतलब 'पंडित' कर दिया है। यह उनके राजनीतिक छलावे का जीता-जागता प्रमाण है।''

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