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2027 चुनाव को लेकर सीएम योगी ने झोंकी ताकत, दो महीनों में 100 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों का किया दौरा - cm yogis aggressive start for 2027 up elections bjp leads

2027 चुनाव को लेकर सीएम योगी ने झोंकी ताकत, दो महीनों में 100 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों का किया दौरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, पिछले दो महीनों में 18 मंडलों की…

Jagran के अनुसार31 जुलाई 2026 को 12:26 am बजे
2027 चुनाव को लेकर सीएम योगी ने झोंकी ताकत, दो महीनों में 100 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों का किया दौरा
 - cm yogis aggressive start for 2027 up elections bjp leads

सौजन्य से:- Jagran

2027 चुनाव को लेकर सीएम योगी ने झोंकी ताकत, दो महीनों में 100 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों का किया दौरा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है, पिछले दो महीनों में 18 मंडलों की 100 से अधिक सीटों का दौरा किया है। ...और पढ़ें

HighLights

- मुख्यमंत्री योगी ने 18 मंडलों में 100 से अधिक सीटें घूमीं।

- भाजपा को 2027 विधानसभा चुनाव में शुरुआती बढ़त मिली।

- सपा-बसपा की जमीनी सक्रियता अभी सीमित दिख रही है।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। वर्ष 2027 के विधान सभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार प्रदेश का दौरा कर चुनावी माहौल में बढ़त बनाने की कोशिश शुरू कर दी है।

पिछले दो महीनों में वह 18 मंडलों की 100 से अधिक विधान सभा सीटों तक पहुंचे हैं। इसके उलट सपा और बसपा की जमीनी सक्रियता अपेक्षाकृत सीमित दिखाई दे रही है, जिससे शुरुआती दौर में भाजपा राजनीतिक बढ़त हासिल करती नजर आ रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दो महीनों में प्रदेश के सभी 18 मंडलों का दौरा करते हुए 100 से अधिक विधान सभा क्षेत्रों में जनसभाएं, विकास कार्यक्रम और समीक्षा बैठकें की हैं। बिजनौर, गाजियाबाद, आगरा, झांसी, मैनपुरी, वाराणसी और गोरखपुर समेत प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी दर्ज हुई। इन दौरों में उन्होंने विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया, अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कीं और जनता को नई योजनाएं समर्पित कीं।

मुख्यमंत्री की सक्रियता केवल चुनावी सभाओं तक सीमित नहीं रही। जनता दर्शन, कानून-व्यवस्था की समीक्षा, संगठनात्मक बैठकों और विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात के जरिए उन्होंने सरकार और संगठन दोनों मोर्चों पर लगातार सक्रियता बनाए रखी।

भाजपा इसे सरकार के कामकाज और जनसंपर्क को साथ लेकर चलने की रणनीति के रूप में पेश कर रही है। दूसरी ओर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की आखिरी बड़ी सार्वजनिक रैली इस वर्ष मार्च में दादरी में हुई थी, जिसे पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत माना गया था।

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इसी तरह बसपा प्रमुख मायावती की प्रदेश में आखिरी बड़ी रैली पिछले वर्ष नौ अक्टूबर को लखनऊ में हुई थी। हालांकि चुनाव में अभी समय है और आने वाले महीनों में सभी दल अपने अभियान को गति देंगे, लेकिन शुरुआती चरण में भाजपा ने आक्रामक जनसंपर्क के जरिए चुनावी मोर्चे पर बढ़त बनाने की कोशिश जरूर कर दी है।

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