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यूपी में ऐप से कैब बुकिंग पर मनमानी रुकेगी: एग्रीगेटर नीति 2026 में यात्रियों की सुरक्षा से लेकर ड्राइवरों के बीमा तक के नियम

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Dainik Bhaskar के अनुसार22 अगस्त 2026 को 01:55 am बजे
यूपी में ऐप से कैब बुकिंग पर मनमानी रुकेगी:  एग्रीगेटर नीति 2026 में यात्रियों की सुरक्षा से लेकर ड्राइवरों के बीमा तक के नियम

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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यूपी में ऐप से कैब बुकिंग पर मनमानी रुकेगी:एग्रीगेटर नीति 2026 में यात्रियों की सुरक्षा से लेकर ड्राइवरों के बीमा तक के नियम

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यूपी में ऐप के जरिए कैब, ऑटो या अन्य यात्री सेवाएं लेने वालों के लिए नई व्यवस्था लागू हो गई है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली-2026 लागू कर एग्रीगेटर कंपनियों के लिए लाइसेंस, सुरक्षा जमा, किराया, यात्री सुरक्षा और ड्राइवरों के हित से जुड़े नियम तय किए हैं। इसके साथ ही UP My Fleet पोर्टल भी शुरू किया गया है। नई व्यवस्था के दायरे में ऐप आधारित यात्री परिवहन के साथ डिलीवरी और लॉजिस्टिक सेवाएं भी आएंगी।

डायनेमिक किराये पर 50% तक की सीमा

नई नीति में ऐप से बुक होने वाली यात्रा के किराये पर भी नियंत्रण की व्यवस्था की गई है। एग्रीगेटर डायनेमिक प्राइसिंग के तहत बेस फेयर से अधिकतम 50% तक ही किराया बढ़ा सकेंगे। यानी मांग बढ़ने के समय किराया मनमाने तरीके से बढ़ाने पर रोक लगाने की कोशिश की गई है।

बुकिंग के बाद पिकअप नहीं किया तो 100 रुपए जुर्माना

बुकिंग स्वीकार करने के बाद अगर चालक बिना उचित कारण यात्री को लेने नहीं पहुंचता है तो 100 रुपए का अर्थदंड लगाया जा सकता है। इस पेनाल्टी का लाभ यात्री को अगली ट्रिप में देने का प्रावधान किया गया है। इससे बुकिंग के बाद ड्राइवर के मनमाने तरीके से ट्रिप कैंसिल करने या पिकअप नहीं करने की समस्या पर रोक लगाने की कोशिश है।

हर यात्री के लिए बीमा जरूरी

नई व्यवस्था में एग्रीगेटर कंपनियों को प्रत्येक यात्री के लिए बीमा की व्यवस्था करनी होगी। वहीं ड्राइवरों के लिए भी सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। उन्हें 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपए का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। ड्राइवरों का चरित्र और पुलिस सत्यापन भी होगा। इसके अलावा उनके मनोवैज्ञानिक परीक्षण और समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग की व्यवस्था भी की गई है।

कंपनियों को लाइसेंस के लिए तय शुल्क देना होगा

एग्रीगेटर कंपनियों के लिए आवेदन से लेकर लाइसेंस तक की प्रक्रिया तय कर दी गई है। आवेदन शुल्क 25 हजार रुपए, जबकि लाइसेंस शुल्क 5 लाख रुपए निर्धारित किया गया है। कंपनियों को अपने वाहन बेड़े के आकार के हिसाब से सुरक्षा जमा राशि भी जमा करनी होगी। 100 बस या 1,000 अन्य वाहनों तक के बेड़े के लिए 10 लाख रुपए, 1,000 बस या 10 हजार अन्य वाहनों तक के लिए 25 लाख रुपए और इससे बड़े बेड़े के लिए 50 लाख रुपए की सुरक्षा राशि तय की गई है।

शिकायत के लिए अलग अधिकारी

यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए हर एग्रीगेटर को ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर नियुक्त करना होगा। यात्री किराये, बुकिंग, ड्राइवर या सेवा से जुड़ी शिकायत इस व्यवस्था के जरिए दर्ज करा सकेंगे।

एनसीआर में प्रदूषण पर भी नजर

नई नीति में खासतौर पर एनसीआर क्षेत्र में चलने वाले एग्रीगेटर वाहनों के प्रदूषण की निगरानी पर जोर दिया गया है। पोर्टल के जरिए वाहनों की मॉनिटरिंग की जाएगी। साथ ही एग्रीगेटर कंपनियों के बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।इससे कैब, डिलीवरी और अन्य व्यावसायिक वाहनों को धीरे-धीरे पेट्रोल-डीजल से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर ले जाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

3.15 लाख से ज्यादा वाहन पोर्टल पर ऑनबोर्ड

सरकार की डिजिटल निगरानी व्यवस्था के तहत UP My Fleet पोर्टल को एग्रीगेटर सेवाओं के प्रबंधन का माध्यम बनाया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एनसीआर क्षेत्र के दो एग्रीगेटर और उनके 3,15,218 वाहन पोर्टल पर ऑनबोर्ड हैं। जिसके जरिए वाहनों का डेटाबेस तैयार होने के साथ उनके नियमों के पालन, प्रदूषण और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव की निगरानी की जा सकेगी।

कंपनियों के साथ यात्रियों और ड्राइवरों को भी फायदा

नई नीति से सरकार के पास एग्रीगेटर कंपनियों की निगरानी का स्पष्ट सिस्टम होगा। कंपनियों को लाइसेंस और संचालन के नियम पता होंगे, जबकि ड्राइवरों को बीमा और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिलेंगी। यात्रियों के लिए सत्यापित ड्राइवर, बीमा, किराये की सीमा, शिकायत निवारण और पिकअप नहीं होने पर 100 रुपए के अर्थदंड जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। यानी यूपी में ऐप आधारित कैब और डिलीवरी सेवाओं को अब केवल निजी कंपनियों की सेवा के रूप में नहीं, बल्कि नियमों के तहत चलने वाली परिवहन व्यवस्था के रूप में संचालित करने की कोशिश की गई है।

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