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यूपी चुनाव में 18900 बूथों के लिए BJP की खास तैयारी, 2024 में वोटरों ने दिया था झटका

यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी उन बूथों पर खास फोकस होगा जो 2022 और 2024 के बीच उसके हाथ से निकल गए थे। लखनऊ: यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत…

Navbharat Times के अनुसार11 सितंबर 2026 को 08:04 am बजे
यूपी चुनाव में 18900 बूथों के लिए BJP की खास तैयारी, 2024 में वोटरों ने दिया था झटका

सौजन्य से:- Navbharat Times

यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी उन बूथों पर खास फोकस होगा जो 2022 और 2024 के बीच उसके हाथ से निकल गए थे।

लखनऊ: यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी बूथ स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। पार्टी का बूथ प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही उन बूथों पर खास फोकस होगा जो 2022 और 2024 के बीच उसके हाथ से निकल गए थे। भाजपा सूत्रों का कहना है कि राज्य में ऐसे लगभग 18900 बूथ हैं जिन्हें पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनावों में जीता था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में हार गई।

भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े 16 सितंबर से 22 सितंबर तक यूपी के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे इन बूथों की समीक्षा करेंगे। साथ ही बूथ वापस जीतने के लिए रणनीति तैयार करेंगे।

लोकसभा चुनावों में भाजपा को झटका लगा

2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को यूपी में काफी झटका लगा, जब वे 33 सीटों पर सिमट गई थी, जबकि 2019 में भाजपा ने 62 सीटों पर कब्जा किया था। इस तरह ये अंतर काफी बढ़ गया था। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतीं, जो कि 2019 में जीती 5 सीटों के मुकाबले बहुत बड़ा अंतर था। भाजपा के लिए बूथ स्तर पर सबसे बड़ा नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ, इन बूथों में से लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में स्थित हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो भाजपा को सबसे अधिक बूथों का नुकसान अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में हुआ है।

अवध में भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा

2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अवध क्षेत्र की 154 सीटों में से 101 और पूर्वांचल की 102 सीटों में से 53 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अवध में भाजपा को अमेठी, फैजाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर में बूथ स्तर पर भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं पूर्वांचल में, गैर-यादव ओबीसी वोटों का एक बड़ा हिस्सा सपा की ओर खिसक गया, जिसके परिणामस्वरूप जौनपुर, गाजीपुर, मछलीशहर, चंदौली और ग्रामीण प्रयागराज में बूथों का नुकसान हुआ। पश्चिम यूपी और रुहेलखंड की 128 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 2022 में 87 सीटें जीती थीं। 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी केवल 65 विधानसभा सीटों पर ही अपनी बढ़त बनाए रख सकी।

बुंदेलखंड में पकड़ खो दी

बुंदेलखंड में भाजपा ने 2022 की 19 विधानसभा सीटों में से 14 पर जीत दर्ज की थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी केवल नौ सीटों पर ही बढ़त बनाई। एंटी-इंकमबेंसी के अलावा, बुंदेलखंड में स्थानीय मुद्दे बड़े कारक रहे जिसकी वजह से पार्टी ने अपनी पकड़ खो दी। सपा के पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड की वजह से भाजपा के पारंपरिक कुर्मी, कुशवाहा और अन्य ओबीसी वोटों में भी सेंध लगी। इसके साथ हीपीडीए कारक और बसपा के जनाधार में गिरावट के कारण गैर-जाटव दलित वोटों का एक बड़ा हिस्सा भी सपा गठबंधन की ओर ट्रांसफर हुआ है।

लेखक के बारे मेंपवन नौटियालपवन नौटियाल नवभारत टाइम्स में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सेक्शन के लिए बतौर कंसलटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का व्यापक पत्रकारीय अनुभव है। मूल रूप से उत्तराखंड (उत्तरकाशी) के रहने वाले पवन को दोनों राज्यों की राजनीति, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, क्राइम और यूटिलिटी खबरों की गहरी समझ है।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2012 में देहरादून से एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के साथ की, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग और कई एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए। उन्होंने 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा की भी क्रेडिबल ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इसके बाद, उन्होंने 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में 5 वर्षों तक डेस्क और फील्ड की दोहरी जिम्मेदारी संभाली। डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए उन्होंने वनइंडिया-डेलीहंट के साथ करीब 5 साल काम किया, जहां उन्होंने उत्तरकाशी के ऐतिहासिक सिलक्यारा टनल हादसे और धराली आपदा जैसी बड़ी घटनाओं को मौके पर जाकर कवर किया। दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले पवन विज्ञान के छात्र रहे हैं, जिससे उनकी खबरों में तार्किक और डेटा-आधारित सटीकता दिखती है।मुख्य विशेषज्ञता (Areas of Expertise)क्षेत्रीय कवरेज: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति, समसामयिक मुद्दे और सामाजिक सरोकार।बीट्स: पॉलिटिकल एनालिसिस, क्राइम, हेल्थ, यूटिलिटी न्यूज और ग्राउंड डिजास्टर रिपोर्टिंग।अनुभव: 14+ वर्ष (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)।पेशेवर यात्रा (Professional Experience)करियर की शुरुआत (2012): देहरादून में न्यूज चैनल से शुरुआत; उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और केदारनाथ आपदा (2013) की लाइव कवरेज। 'लोकस्वामी' मैगजीन के लिए अहम कवर स्टोरीज।प्रिंट मीडिया (5 वर्ष): 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर/रिपोर्टर डेस्क और फील्ड रिपोर्टर के तौर पर काम।डिजिटल मीडिया (5 वर्ष): 'वनइंडिया-डेलीहंट' में यूपी-उत्तराखंड के चुनाव और बड़ी घटनाओं की कमान। उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल रेस्क्यू और धराली आपदा की ग्राउंड रिपोर्टिंग।शिक्षा और क्रेडेंशियल (Education & Credentials)पोस्ट ग्रेजुएशन: मास कम्युनिकेशन (नई दिल्ली)।ग्रेजुएशन: साइंस स्ट्रीम (जो उनकी खबरों को एक विश्लेषणात्मक और सटीक दृष्टिकोण देता है)।स्थानीय जुड़ाव: मूल निवासी उत्तरकाशी (उत्तराखंड), जिससे उन्हें पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों की स्वाभाविक और प्रामाणिक समझ है।... और पढ़ें

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