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कानपुर में फिर उफनाई गंगा, खतरे में 176 गांव, जानिए 2010 में कैसी मची थी इन गांवों में तबाही

कानपुर में फिर उफनाई गंगा, खतरे में 176 गांव, जानिए 2010 में कैसी मची थी इन गांवों में तबाही पढ़िए अविनाश कुमार के संपादन में संवाददाता आयुष त्रिवेदी की ग्राउंड रिपोर्ट By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Published : August…

ETV Bharat के अनुसार31 अगस्त 2026 को 03:31 am बजे
कानपुर में फिर उफनाई गंगा, खतरे में 176 गांव, जानिए 2010 में कैसी मची थी इन गांवों में तबाही

सौजन्य से:- ETV Bharat

कानपुर में फिर उफनाई गंगा, खतरे में 176 गांव, जानिए 2010 में कैसी मची थी इन गांवों में तबाही

पढ़िए अविनाश कुमार के संपादन में संवाददाता आयुष त्रिवेदी की ग्राउंड रिपोर्ट

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 31, 2026 at 8:12 AM IST

कानपुर: यूपी के कानपुर के गंगा तट पर फिर से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. गंगा अपने रौद्र रूप में फिर से लौट आई है, जिससे सितंबर 2010 की भयावह यादें ताजा हो गई हैं. उस समय रातों-रात पानी ने गांवों को डुबो दिया था और खेत-खलिहान और घर-बार सब कुछ पानी में डूब गए थे. वहीं बढ़ते जलस्तर ने फिर से ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है और फसलों को बर्बाद कर दिया है. स्थिति को नियंत्रण में होने का दावा इस बार जरूर किया जा रहा है, लेकिन क्या है वह वजह जो इस बार भी लोगों को खतरे की घंटी सुनाने पर मजबूर कर रही है? पढ़िए ईटीवी भारत की ग्राउंड रिपोर्ट, जिसमें जानिए कैसे गंगा का रुख बदल रहा है व किन इलाकों में से पानी ने घुसपैठ कर ली है और कितनी तैयारियों के बीच हम इस प्राकृतिक संकट से निपट रहे हैं.

दरअसल, पहाड़ों और ऊपरी हिस्सों से लगातार हो रही बारिश और पानी छोड़े जाने के कारण कटरी क्षेत्र के करीब 176 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है. वर्तमान में जिस तरह से गंगा का पानी तेजी से बढ़ रहा है, उससे आसपास के ग्रामीणों के जहन में सितंबर 2010 की डरावनी यादें और सिहरन फिर से ताजा हो गई हैं. उस दौरान लगातार मूसलाधार बारिश और ऊपरी बांधों से छोड़े गए पानी के कारण गंगा का जलस्तर कानपुर गेज स्टेशन पर पिछले 42 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 115 मीटर के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था, जिससे कई जिले और सैकड़ों गांव इसकी चपेट में आ गए थे.

पानी में डूबा स्कूल, प्रभावित हुई बच्चों की पढ़ाई:

मुकेश के अनुसार इस समय लौकी और अमरूद के बाग जैसी फसलें थीं, जो पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं. डर इस बात का है कि अगर पानी और बढ़ा, तो मुसीबतें और गहरी हो जाएंगी. बढ़ते जलस्तर का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि नौनिहालों की शिक्षा पर भी इसका सीधा असर पड़ा है. लोधवाखेड़ा ग्राम स्थित प्राथमिक विद्यालय में गंगा का पानी भर जाने के कारण स्कूल को तुरंत दूसरे स्थान पर शिफ्ट करना पड़ा है.

विद्यालय के शिक्षक महेश प्रसाद ने बताया कि जलस्तर बढ़ने के कारण विद्यालय में गंगा का पानी भर गया है. इसलिए हमारे स्कूल को पूर्व माध्यमिक विद्यालय लोधवाखेड़ा में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. हम बीच-बीच में जाकर जायजा लेते हैं कि पानी कम हुआ या बढ़ रहा है. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन पानी में तो पढ़ाया नहीं जा सकता, इसलिए बगल के स्कूल में व्यवस्था की गई है.

बढ़ते जलस्तर से अटल घाट की सीढ़ियां डूबीं: महेश प्रसाद ने बताया कि लगातार बढ़ते जल स्तर से नवाबगंज क्षेत्र में स्थित अटल घाट की सीढ़ियां भी डूब चुकी हैं. घाट पर आने वाले लोगों को नीचे उतरने से प्रतिबंध लगा दिया गया है. प्रशासन के द्वारा घाट के आसपास से बैरिकेटिंग की गई है. नाव चलाने वाले नाविकों को गंगा में जाने से सख्त रोक लगाई गई है. घाट के आसपास लगातार प्रशासन के द्वारा निगरानी के लिए पुलिस को तैनात किया गया है.

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