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शामली धर्मांतरण मामले में बड़ा ट्विस्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक को 16 सितंबर को पेश करने का दिया आदेश

शामली धर्मांतरण मामले में बड़ा ट्विस्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक को 16 सितंबर को पेश करने का दिया आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पिता को 16 सितंबर को आयुष को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है. By…

ETV Bharat के अनुसार13 सितंबर 2026 को 03:04 am बजे
शामली धर्मांतरण मामले में बड़ा ट्विस्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक को 16 सितंबर को पेश करने का दिया आदेश

सौजन्य से:- ETV Bharat

शामली धर्मांतरण मामले में बड़ा ट्विस्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक को 16 सितंबर को पेश करने का दिया आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पिता को 16 सितंबर को आयुष को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 12, 2026 at 8:54 PM IST

शामली: उत्तर प्रदेश के शामली जिले में हुए आयुष मलिक के धर्मांतरण मामले में एक नया मोड़ सामने आया है. आयुष के दोस्त ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके उसके पिता पर अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगाया है. हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और आयुष के पिता को आदेश जारी किया है कि वे 16 सितंबर को आयुष मलिक को अदालत के सामने पेश करें.

शामली के दयानंद नगर निवासी देवराज मलिक ने 6 जून 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.

पुलिस ने चांदनी कुरैशी और उसके पिता को भेजा था जेल: पिता ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे आयुष मलिक को चांदनी कुरैशी नाम की युवती ने प्रेम जाल में फंसाकर उसका धर्मांतरण करा दिया. पुलिस ने इस तहरीर के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम कुरैशी और एक रिश्तेदार को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था.

अब इस पूरे मामले में आयुष के दोस्त सुल्तान की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पिता देवराज सिंह मलिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

स्वतंत्र इच्छा से धर्म परिवर्तन और विवाह का दावा: याचिका में दावा किया गया है कि 31 वर्षीय आयुष मलिक ने बिना किसी दबाव या प्रलोभन के अपनी स्वतंत्र इच्छा से धर्म स्वीकार किया था. इसके बाद उसने पिता की मर्जी के खिलाफ चांदनी कुरैशी से शादी कर ली, जिससे नाराज होकर पिता ने शामली थाने में मुकदमा दर्ज कराया था.

याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुलिस और अधिकारियों से मिलीभगत करके पिता ने आयुष को अवैध रूप से घर में कैद कर रखा है और उसकी आजादी छीन ली है. सुल्तान का दावा है कि आयुष ने खुद उससे मदद की गुहार लगाई थी.

16 सितंबर को कोर्ट में पेश न करने पर अधिकारियों पर गिरेगी गाज: अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए कहा कि 16 सितंबर को अगर आयुष को पेश नहीं किया गया, तो पुलिस अधीक्षक और थानाध्यक्ष शामली को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करके वजह बतानी होगी. एसपी शामली नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराया जाएगा. वहीं दूसरी तरफ पिता देवराज मलिक का कहना है कि उन्हें अभी तक हाईकोर्ट की ओर से कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है.

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