योगी बोले- यूपी में 16.5 लाख कर्मी, 9.5-लाख हमने भरे: हम 10 कदम आगे की सोचते हैं; लखनऊ में ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट का उद्घाटन किया - Lucknow News
- Hindi News - Local - Uttar pradesh - Lucknow - Lohia Institute Foundation Day | CM Yogi Inaugurates Organ Transplant Unit योगी बोले- यूपी में 16.5 लाख कर्मी, 9.5-लाख हमने भरे:हम 10 कदम आगे की सोचते हैं; लखनऊ में ऑर्गन…

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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योगी बोले- यूपी में 16.5 लाख कर्मी, 9.5-लाख हमने भरे:हम 10 कदम आगे की सोचते हैं; लखनऊ में ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट का उद्घाटन किया
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में इस समय करीब 16.5 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से 9.5 लाख हमने भरे। हम बैठने वाले नहीं हैं, बल्कि समय से 10 कदम आगे चलकर सोचेंगे और अपनी गति को आगे बढ़ाएंगे। योगी लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के छठे स्थापना दिवस कार्यक्रम में पहुंचे थे।
उन्होंने संस्थान में ऑर्गन ट्रांसप्लांट (अंग प्रत्यारोपण) यूनिट शुरू की। इमरजेंसी के 40 वार्ड के नए वार्ड का भी लोकार्पण किया। सीएम योगी ने बताया कि संस्थान में 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर बन रहा है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान पूर्वी यूपी के लोगों के लिए सबसे मददगार संस्थान है।
संस्थान का स्थापना दिवस रविवार शाम 4 बजे से गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हॉल में मनाया गया। इसमें संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट से मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मिल सकेगी। संस्थान में बोनमैरो और लिवर ट्रांसप्लांट की तैयारी भी चल रही है।
3 तस्वीरें देखिए-
स्थापना दिवस के अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
अपडेट्स
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- अनुज कुमार शुक्ला, तकनीकी अधिकारी – परफ्यूजन
- ममता तिवारी, डायटीशियन
- सावन कुमार, डायटीशियन
- निखिल फाल्सवाल, नेत्र तकनीशियन ग्रेड-1
- कविता यादव, नेत्र तकनीशियन ग्रेड-1
- जीतेंद्र सैनी, रेडियोलॉजी तकनीशियन
- मोहसिन बाबू, रेडियोलॉजी तकनीशियन
- गुफरान अली, रेडियोथेरेपी तकनीशियन
- काजल शर्मा, जूनियर फिजियोथेरेपिस्ट
- फरिया खान, मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट
- पूजा गुप्ता, जूनियर मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट
- प्रिंस कुमार, ओटी असिस्टेंट (ओटी क्षेत्र)
- हरवेंद्र यादव, डायलिसिस तकनीशियन
- अंजलि वर्मा, वर्कशॉप तकनीशियन ग्रेड-2 – प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स
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सीएम योगी ने कहा- मैं आज के इस संस्थान (डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान) के बारे में जरूर कहूंगा कि संस्थान अपनी आगामी यात्रा के लिए अपने आपको तैयार करे। संस्थान ने जो भी डिमांड शासन से की थी, शासन ने उस डिमांड को पूरा करने में कोई कोताही नहीं बरती। मैंने कहा कि आज हमारे पास यंग वर्कफोर्स काम कर रही है।
आप सोचिए, उत्तर प्रदेश के अंदर अब लगभग 16.5 लाख सरकारी कर्मचारी हैं। इनमें से साढ़े नौ लाख कर्मचारियों की भर्ती हमने की है। इस यंग वर्कफोर्स में गति है। जब गति होती है तो प्रगति को कोई रोक नहीं सकता, क्योंकि लीडरशिप का विजन स्पष्ट है।
- संस्थान जितनी डिमांड भेजते हैं, हम उसे पूरा करते हैं
आज हमारे पास संसाधनों का अभाव नहीं है। संस्थान जितनी डिमांड भेजते हैं, हम उसे पूरा करते हैं। अब अगर संस्थान उस संसाधन को खर्च नहीं कर सके तो इसमें शासन नहीं, संस्थान के ऊपर ही सवाल खड़े होते हैं।
इसलिए मैं कहूंगा कि अपने आपको सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में तैयार करें। प्रदेश के तमाम अच्छे संस्थानों के साथ आपसी सहयोग के माध्यम से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की दिशा में आगे बढ़ें। हमें यहां क्लिनिकल एक्सीलेंस, एकेडमिक एक्सीलेंस और रिसर्च एक्सीलेंस के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के मॉडल के रूप में संस्थान को प्रस्तुत करना है।
इस विश्वास के साथ संस्थान दिवस के अवसर पर मैं डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान को हदय से बधाई देता हूं और अपनी शुभकामनाएं देता हूं। आप सभी के प्रति मंगलमय शुभकामनाएं प्रकट करते हुए और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की दिशा में प्रभावी कदम बढ़ाने का आह्वान करते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं।
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मुझे याद है कि कोविड काल के दौरान मैं आईआईटी से कहता था कि आप डायग्राम के माध्यम से मेरे सामने कोविड की स्थिति प्रस्तुत करें। उस डायग्राम से हम अंदाजा लगाते थे कि आने वाले समय में क्या स्थिति होने वाली है। तब मैं भारत सरकार के सामने प्रेजेंटेशन देता था तो उस डायग्राम का इस्तेमाल करता था। मैं बताता था कि हमारे यहां यह स्थिति है और हम इसे यहां से नियंत्रित कर सकते हैं।
तब हमारे फील्ड वर्कर्स ने बहुत अच्छा काम किया था। एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने फील्ड में रहकर दस्तक अभियान चलाया। डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग के कार्यक्रम से जुड़े। घर-घर जाकर उन्होंने शासन और प्रधानमंत्री जी के विजन को जमीन पर लागू करने का काम किया।
परिणाम यह हुआ कि यूपी जैसे राज्य में हमने कोविड महामारी को पूरी तरह नियंत्रित करने में सफलता पाई। कोविड का मुकाबला करने के लिए हमें इसी दिशा में आगे काम करना होगा। मैं मानता हूं कि लीडरशिप, लर्निंग और डिस्कवरी, ये तीनों एक साथ चलेंगे, तभी कोई इंस्टीट्यूट सेंटर ऑफ एक्सिलेंस के रूप में विकसित होता है।
- लोहिया संस्थान सेंटर ऑफ एक्सिलेंस बन सकता है
आज जो डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान है, उसकी छह वर्षों की प्रगति साफ दिखाई देती है। यहां हीलिंग भी हुई है, लर्निंग भी हुई है और रिसर्च भी हुई है। यहां के रिसर्च पेपर इस बात को दिखाते हैं कि ये तीनों चीजें एक साथ चल रही हैं।
इसलिए संस्थान अपने आपको सेंटर ऑफ एक्सिलेंस के रूप में विकसित कर सकता है। आने वाले वर्षों में हमारे सामने क्लिनिकल एक्सिलेंस, एकेडमिक एक्सिलेंस और रिसर्च एक्सिलेंस की चुनौतियां होंगी। इसके लिए हमें अभी से अपने आपको तैयार करना होगा। अभी आपकी प्रारंभिक यात्रा है। आपने इस इंस्टीट्यूट को एक स्वरूप दिया है। आने वाले समय में इस जिम्मेदारी को और मजबूती के साथ आगे बढ़ाना होगा।
मुझे अच्छा लगा कि यहां के दो फैकल्टी की पब्लिकेशन का भी आज विमोचन किया गया है। इनमें डॉक्टर अजय कुमार वर्मा जी और डॉक्टर एस.एस. सिन्हा की पब्लिकेशन शामिल हैं। एक लिखने की आदत भी बहुत जरूरी है। एक-एक पेशेंट आपके लिए अपने आप में एक लैबोरेटरी भी होता है। मरीज के प्रति आपका व्यवहार उसकी हीलिंग में बहुत मदद कर सकता है। उसके साथ आपका संवाद आगे के इनोवेशन और रिसर्च में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- यूपी सरकार ने आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर मेडिकल सेंटर ऑफ एक्सिलेंस विकसित करने का काम शुरू किया है। एसजीपीजीआई में भी एक सेंटर ऑफ एक्सिलेंस विकसित किया जा रहा है। अब यूपी में मेडिकल डिवाइस पर पीजी के साथ काम शुरू किया जा रहा है। हमने यूपी में फार्मा पार्क का निर्माण भी शुरू कर दिया है।
यूपी देश का सबसे बड़ा फार्मा बाजार है, लेकिन यहां से एक भी दवा का उत्पादन नहीं हो पाता था। इसके लिए रिसर्च और सरकारी स्तर पर भी कोई खास गतिविधि नहीं चल पाती थी। आज उस दिशा में काम शुरू हुआ है और इसके बहुत अच्छे परिणाम आ रहे हैं।
देश से लोग अब यूपी आकर काम करना चाहते हैं। इस क्षेत्र में आपका संस्थान भी बड़ी मदद कर सकता है। अच्छे तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर अगर हमारे चिकित्सा संस्थान काम करते हैं तो राज्य सरकार की ओर से हर प्रकार की मदद की जाएगी।
आईआईटी और दूसरे तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि वे इन प्रोजेक्ट में योगदान दे सकें। यूपी को इस क्षेत्र का हब बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। हमें समय से दस कदम आगे सोचने की क्षमता रखनी होगी। बीमारी का पैटर्न बदल रहा है। इसके कारणों और उपचार के लिए उसी तरह के रिसर्च को आगे बढ़ाना होगा। अगर हम इससे थोड़े भी पीछे रहे तो दिक्कतें आएंगी।
चिकित्सा, मेडिसिन, टेक्नोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन की जो भूमिका हो सकती है, उसे हमें साथ लेकर चलना होगा। केवल उपचार तक सीमित नहीं रहना है। उपचार के डेटा को भी संरक्षित करना होगा। यह डेटा आने वाले समय में हमारे लिए बहुत उपयोगी होने वाला है।
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योगी ने कहा- याद करिए, आप स्वास्थ्य के क्षेत्र में हैं। जापान ने 1905 में इंसेफलाइटिस की वैक्सीन विकसित कर दी थी, लेकिन भारत में इसे आने में करीब 100 साल लगे। 2005 में जब हमने इसके लिए बड़ा आंदोलन किया, तब जाकर यह वैक्सीन भारत में आ पाई।
100 साल बाहर से वैक्सीन आने में भारत को लगे, लेकिन कोविड जैसी चुनौती के दौरान हमारे वैज्ञानिकों और फैकल्टी ने प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में मात्र नौ महीने में कोविड-19 की एक नहीं, दो-दो वैक्सीन विकसित कीं। न केवल भारत के नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराई गई, बल्कि 100 से ज्यादा देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई गई। आज हम अपने काम को आगे बढ़ा सकते हैं। इस दिशा में काम किए जाने की जरूरत है।
- ट्रेडिशनल मेडिसिन से राहत संभव हो तो उसे भी करें
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- यह एक अस्पताल से संस्थान बनने की आपकी एक सुखद अनुभूति का क्षण है। संस्थान स्थापना दिवस का यह कार्यक्रम मेरे लिए भी खास है। आज के इस अवसर पर मैं आपसे कुछ बातें शेयर जरूर करना चाहूंगा। आज का समय टेक्नोलॉजी का समय है। हर क्षेत्र में संभावनाएं हैं और उन संभावनाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है। हमें यह भी देखना होगा कि ट्रेडिशनल मेडिसिन में कौन सी ऐसी संभावनाएं हैं, जिन्हें हम अपने यहां अपनाकर मरीज को राहत दे सकते हैं। मॉडर्न मेडिसिन में भी इन संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए हम और क्या कर सकते हैं, इस पर काम करना होगा।
- हमारे ही डेटा पर पश्चिमी देश रिसर्च पेपर प्रस्तुत करते हैं
हमारे आसपास के परिवेश में हमारे ही डेटा पर वेस्टर्न कंट्रीज रिसर्च पेपर प्रस्तुत करते हैं। हम अपने डेटा को संरक्षित नहीं कर पाते। वे हमारे डेटा से रिसर्च पेपर बनाते हैं, लेकिन हम अपने डेटा और अनुभव का इस्तेमाल स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने के लिए नहीं कर पाते। ऐसा नहीं है कि हमारे पास प्रतिभा की कमी है। आज हमारे पास संसाधन भी हैं, तकनीक भी है और यंग वर्कफोर्स भी है। केवल आवश्यकता उस विल पावर के साथ आगे बढ़ने की है, जो आज भारत की ताकत बनने जा रही है।
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सीएम योगी ने कहा- मुझे याद है 2017 के पहले मैं गोरखपुर से सांसद था। एक सांसद के नाते हम अक्सर इस बात की मांग उठाते थे कि यूपी के अंदर मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़नी चाहिए। नहीं बढ़ती थी। हम लोगों ने भारत सरकार के सामने प्रस्ताव रखा। जब प्रधानमंत्री मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने, उनके सामने भी हमने प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्कीम तैयार करनी चाहिए, जिससे अधिक से अधिक मेडिकल कॉलेज बनें। यह देश की आवश्यकता है। नए डॉक्टर आएं और आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए उस प्रकार की सुविधाओं को आगे बढ़ाया जाए।
मुझे याद है, पहले चरण में यूपी के लिए 17 मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर के लिए एक एम्स स्वीकृत किया था मोदीजी ने। मुझे पता है कि तत्कालीन सरकार ने मेडिकल कॉलेज बनाने से इनकार कर दिया था। एम्स गोरखपुर के लिए ऐसी भूमि उपलब्ध कराई गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट से विवाद था। यानी उस जमीन पर कभी एम्स नहीं बन सकता था। क्योंकि अगर हम उसके भरोसे रहते तो कभी नहीं बनता। मैं जानता हूं कि जब राजस्व से जुड़े मामले और सिविल से जुड़े मामले कहीं फंसते हैं तो उन्हें पूरा होने में कई दशक लग जाते हैं। हमारा स्वयं का एक मामला एक बार कोर्ट में चला गया था। लैंड से संबंधित मामला था। 1949 में न्यायालय में दर्ज हुआ मामला और उसके बाद पहले गोरखपुर से, फिर हाईकोर्ट से और अंततः सुप्रीम कोर्ट से उसका फैसला हमारे पक्ष में 1997 में हुआ।
- पिछली सरकार चाहती थी 50 साल तक एम्स का इंतजार कराएं
अब सोचिए, जब 50 साल कोई इंतजार करेगा तो फैसला होगा। गोरखपुर के लोगों को भी चाहते थे, पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को भी पिछली सरकार चाहती थी कि 50 साल तक एम्स का इंतजार करवाएं। उत्तर प्रदेश की जनता ने 2017 में फैसला लिया कि हमारी सरकार है। हमने तत्काल उस जमीन को विड्रॉ किया, नई जमीन आवंटित करवाई और आज गोरखपुर में एम्स सफलतापूर्वक संचालित है। राइटर की बाइटरली ने एम्स की समस्या का समाधान किया। आज मुझे संतुष्टि है कि यूपी में मेडिकल कॉलेजों की संख्या, जो पहले प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 41 मेडिकल कॉलेज थे, आज बढ़कर 81 मेडिकल कॉलेज हो गए हैं। इनमें एम्स भी संचालित हैं।
- नए मेडिकल फैकल्टी की भर्ती हम लोगों ने की
यूजी की सीटों की संख्या में भी प्रगति हुई है। पहले यूपी में कुल 4,690 एमबीबीएस सीटें थीं, आज यह बढ़कर 13,600 हो गई हैं। पीजी की सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 हुई हैं। नर्सिंग कॉलेज पहले केवल दो थे, जो 2017 से पहले थे। आज 26 नर्सिंग कॉलेज बन चुके हैं और 33 जिलों में ये संचालित हैं। ये हमारे हेल्थ स्ट्रक्चर की बैकबोन हैं। अगर आप देखें तो मेडिकल फैकल्टी की संख्या पहले हमारे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1,247 थी। आज यह बढ़कर 2,300 से अधिक हो गई है। यानी नए मेडिकल फैकल्टी की भर्ती हम लोगों ने की है। भर्ती करने के साथ उन्हें प्रदेश के अंदर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगाया गया है।
- यूपी ऐसा राज्य जिसके पास पैसे की कमी नहीं है
आज इसी का परिणाम है कि जो फैकल्टी आई, जो पैसा सरकार ने दिया, उसने 20 बेड के अस्पताल को 1,400 बेड के सुपर स्पेशलिटी संस्थान के रूप में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जबकि, जितना है, उतना पाइपलाइन में है। एक हजार बेड का नया अस्पताल भी बनने जा रहा है। 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर भी यहां बनने जा रहा है। अन्य जितनी सुविधाओं के लिए किसी भी मेडिकल कॉलेज से राज्य सरकार के पास प्रस्ताव आया, हमने कभी मना नहीं किया। लोग सोचते हैं, कहते हैं कि यूपी अकेला राज्य है, जो आज देश के अंदर ऐसा राज्य है, जिसके पास कैपिटल एक्सपेंडिचर की कमी नहीं है। किसी भी प्रकार के पैसे की कमी नहीं है। एजुकेशन में, हेल्थ में या इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, इंडस्ट्री के लिए, मॉडर्न टेक्नोलॉजी के लिए कहीं पैसे की कमी नहीं है।
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हमारे पास आज सुविधाएं हैं। आज से नौ-दस वर्ष पहले साधन नहीं थे, सुविधाएं नहीं थीं, संसाधन नहीं थे। कोई सीमा नहीं थी, पैसा कहां से आएगा? एक गरीब मरीज का पूरा खर्च कैसे भरा जाएगा? उसके सामने चुनौतियां हुआ करती थीं। आज प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत की सुविधा है, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना की सुविधा है, पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध है। जहां कोई सहयोग करने को तैयार नहीं है, कोई सुविधा में वंचित नहीं हो रहा है, लेकिन उसे लगता है कि उसे स्वयं सहयोग की आवश्यकता है तो सीएम रिलीफ फंड से हम उसे पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराते हैं। वहां से उसे सहायता मिल जाती है।
वह अपना उपचार कहीं भी जाकर करा सकता है, किसी भी पैनल अस्पताल में जाकर इलाज करा सकता है। हम उसे यह सुविधा उपलब्ध कराते हैं। लेकिन, समस्या पैसे की आज के दिन नहीं है। आज हमारे सामने सबसे बड़ा चैलेंज था कि वेटिंग लिस्ट को हम कैसे कम करें। किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में जिस तेजी के साथ इसने अपनी प्रगति की है, वह अपने आप में हजारों मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा अन्य जटिल रोगों के इलाज के लिए भी अब संस्थान अपने आपको तैयार कर रहा है।
- आज रोबोटिक के साथ गामा नाइफ सर्जरी भी
मुझे यह देखकर भी बहुत अच्छा लगा। खासतौर पर मैं अक्सर देखता था, जब मैं यहां पहली बार आया था तो यहां न्यूरोसर्जरी के बारे में यह मांग उठी थी कि हमें गामा नाइफ की सर्जरी यहां देनी चाहिए। मैंने तब भी कहा था कि संस्थान में यह सुविधा होनी चाहिए। मुझे खुशी है कि डायरेक्टर ने इसमें रुचि ली। आज रोबोटिक सर्जरी के साथ-साथ गामा नाइफ और लेजर, डायग्नोस्टिक की सुविधा, एडवांस इमेजिंग की व्यवस्था, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ की सुविधा आज संस्थान उपलब्ध करवा रहा है। यह एक अच्छा प्रयास है। यहां के डायरेक्टर ने एक और अच्छी पहल की है कि हम प्रवेश के दस जनपदों में वर्चुअल आईसीयू का संचालन कर रहे हैं। वहां हार्ट से जुड़े हुए जो भी मरीज हैं, जो भी बीमारियां हैं, उनसे जुड़े मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
- टेली कंसल्टेशन की सुविधा को तेजी से बढ़ाने की जरूरत
यह संभव है कि तकलीफ बहुत हद तक हो चुकी है। इन बड़े संस्थानों को थोड़ा भी हम अपडेट कर लें, थोड़ी भी रुचि लें तो टेलीमेडिसिन आज के दिन बहुत बड़ी सेवा कर सकती है। टर्शियरी केयर के हमारे संस्थानों में जो भीड़ है, उस भीड़ को हम टेली कंसल्टेशन के माध्यम से कम कर सकते हैं। गंभीर रोगों से जुड़े मरीजों के लिए अधिक समय दे सकते हैं और दूर-दराज के गांवों में चिकित्सकों की कमी को भी काफी हद तक पूरा कर सकते हैं। टेली कंसल्टेशन की इस सुविधा को और तेजी के साथ आगे बढ़ाने के लिए समय के अनुसार प्रयासों को आज तेजी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रदेश में मेडिकल हेल्थ के क्षेत्र में जो प्रगति हुई है, हर क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में प्रगति हुई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश पीछे नहीं है।
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योगी ने कहा- मैं मानता हूं कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि अब यूपी के लोगों के सामने पहचान का संकट नहीं है। कहीं भी जाते हैं तो सीना तानकर कह सकते हैं कि हम उत्तर प्रदेश के हैं। सामने वाला हमसे सवाल खड़ा नहीं करता। यह आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से झलकता है। इसी आत्मविश्वास के एक नए रूप के रूप में हमारा डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान भी सामने आया है।
मैंने यहां देखा कि संस्थान ने केवल नियुक्ति पत्र देकर अपनी फैकल्टी और पैरामेडिक्स को सम्मानित नहीं किया, बल्कि संस्थान ने पिछले वर्ष या उससे पहले तय की गई कार्य योजनाओं को भी पूरा करके आगे बढ़ाया है। मुझे प्रसन्नता है कि आज यहां ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट के लोकार्पण का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ। इसके बारे में हमारे संस्थान के निदेशक ने अपने प्रस्तुतिकरण में विस्तार से जानकारी दी थी। बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी यहां बहुत शीघ्र शुरू होने जा रही है। यानी ये संस्थान की कार्य योजनाएं हैं। हम बैठने वाले नहीं हैं, बल्कि समय से दस कदम आगे चलकर सोचेंगे और अपनी गति को आगे बढ़ाएंगे।
- पूर्वी यूपी की सबसे ज्यादा पहुंच आरएमएल में
इन सबके साथ-साथ संस्थान ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना के साथ महत्वपूर्ण काम किया है। लखनऊ में आरएमएल की लोकेशन ऐसी है कि पूरे पूर्वी यूपी की पहली पहुंच कहीं होती है तो वह इस संस्थान में रहती है। बड़ी संख्या में इस प्रकार के मरीज यहां आते हैं, जिनको पहले डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती थी। आज प्रदेश के कई जिला अस्पतालों में दस-दस बेड डायलिसिस के लिए निशुल्क उपलब्ध करवाए गए हैं।
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योगी ने कहा- आज मुझे अच्छा लगा कि पारदर्शी तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का परिणाम है कि मंच पर नए टेक्नीशियन और फैकल्टी मेंबर्स को सम्मानजनक ढंग से नियुक्ति पत्र दिए गए। कोई भेदभाव नहीं है। हम उन्हें अपने हाथों से नियुक्ति पत्र देते हैं। यह जानकारी भी सामने आती है कि कौन कहां से नियुक्ति पत्र प्राप्त कर रहा है और संस्थान या राज्य की विभिन्न सेवाओं में आने वाले लोगों की पसंद क्या है?
बहनों और भाइयों, पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान हमने प्रदेश में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। अब आप मानकर चलें, एक भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि सरकारी नियुक्ति में कोई भेदभाव हुआ है। कोई यह नहीं कह सकता कि नियुक्ति में किसी प्रकार का लेनदेन हुआ है। कोई व्यक्ति उंगली नहीं उठा सकता कि इन वर्षों में उस प्रक्रिया में किसी को उंगली उठाने का अवसर मिला।
जब नियुक्ति में पारदर्शिता और शुचिता होती है तो राज्य की प्रगति भी उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ती है। यहां के संचालक ने बताया कि हमने नौ वर्षों में यूपी की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने में सफलता प्राप्त की है। यूपी की प्रति व्यक्ति आय को भी तीन गुना करने में सफलता मिली है।
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सीएम योगी ने कहा- आज स्थापना दिवस के अवसर पर सभी फैकल्टी मेंबर्स, रेजिडेंट चिकित्सकों और पैरामेडिक्स को सम्मानित किया गया है। मैं उन सभी को हृदय से बधाई देता हूं और उनका अभिनंदन करता हूं। नियुक्ति की प्रक्रिया जितनी पारदर्शी होगी, परिणाम उतना ही हमारे लिए फलदायी होगा। अच्छे लोगों का चयन अगर हम नहीं करेंगे, चयन प्रक्रिया में विसंगतियां होंगी, भेदभाव होगा, पारदर्शिता और शुचिता का अभाव होगा, तो जीवन भर पूरे संस्थान को उसकी कीमत चुकानी होगी।
गलती एक व्यक्ति करता है, लेकिन कीमत संस्थान को चुकानी पड़ती है और पहचान का संकट उस संस्थान से जुड़े सभी लोगों के सामने खड़ा होता है। ठीक वैसे ही जैसे एक व्यक्ति और एक परिवार की कीमत उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट, कानून व्यवस्था के भीषण संकट, अराजकता और भ्रष्टाचार के रूप में चुकानी पड़ती थी। एक व्यक्ति गलत करता है, लेकिन कीमत पूरे प्रदेश को चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
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सीएम योगी ने कहा- मुझे अच्छा लगा कि यहां संस्थान की प्रगति में योगदान देने वाले उन नींव के पत्थरों को सम्मानित किया गया, जिनके कारण यह संस्थान आज नई गरिमा और नए गौरव के साथ आगे बढ़ रहा है।
वास्तव में 2017 में हम सबके सामने एक प्रश्न आया था कि अस्पताल रहेगा या संस्थान बनेगा? उस समय असमंजस की स्थिति थी। आपसी विवाद भी होते थे। तब तय हुआ कि इसे संस्थान में बदलना है। जो लोग संस्थान में आने के इच्छुक होंगे, वे संस्थान में रहेंगे। जो जहां जाना चाहेंगे, उन्हें स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल में स्थानांतरित किया जा सकता है।
उस समय मैं स्वयं भी यहां का गवाह रहा था। लेकिन, उस समय यह कल्पना नहीं थी कि संस्थान इतनी तेजी से आगे बढ़ेगा। जिसको लेकर यहां हमारे राज्यमंत्री और संस्थान के अधिकारी बता रहे थे कि कम से कम 20 बेड का एक छोटा-सा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनकर रहने वाला अस्पताल, आज उत्तर प्रदेश का एक बेहतरीन स्वास्थ्य और शिक्षा का केंद्र बनकर भारत सरकार और प्रधानमंत्रीजी के विजन को जमीन पर उतारने का काम करेगा।
- आरएमएल की शिकायतें कम आती हैं, पहले रोज आती थीं
मैं कह सकता हूं कि पिछले कुछ समय से मेरे पास यहां (आरएमएल) की शिकायतें भी अब कम आती हैं। नहीं तो रोज समय-समय पर शिकायतें आती रहती थीं। हम परेशान होते थे। पैसा देते-देते तो हमें परेशानी नहीं होती थी, लेकिन शिकायत सुनते-सुनते परेशानी जरूर होती थी। लेकिन, अब उससे मुक्ति मिली है। यह मुक्ति तभी मिलती है, जब जनता में संतुष्टि होती है, लोगों में संतोष होता है और सुविधाएं मिलती हैं।
ये परिणाम तभी आते हैं, जब पूरी टीम को लेकर चलने की हमारी सामर्थ्य होती है और टीम को इसका श्रेय भी दिया जाता है। मुझे बहुत अच्छा लगा कि आज उस टीम का स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान ने सम्मान किया। उन लोगों का सम्मान किया, जिन्होंने अपने कर्तव्यों के माध्यम से संस्थान की प्रगति को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
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ब्रजेश पाठक ने कहा- आप तो उंगलियां उठाते थे, मजाक उड़ाते थे? एक बार जब आंखें बंद करके विपक्ष के लोगों से कहूंगा कि चिंतन-मनन करिएगा। ईश्वर को साक्षी मानकर, बाबा हनुमान जी को साक्षी मानकर सोचिए कि कहां चूक हुई आपसे?
आपने प्रदेश को गुंडाराज, भ्रष्टाचार और दंगा-फसाद में झोंकने का काम किया था। क्या सोचते हैं? उत्तर प्रदेश के लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा सवई में डांस देखने के लिए खर्च किया जाएगा? उत्तर प्रदेश के लोग कभी आपको स्वीकार नहीं करेंगे।
इस मंच के माध्यम से मैं स्थापना दिवस से कह रहा हूं। आप तो कह रहे होंगे कि यहां पॉलिटिकल बात क्यों करने लगे? अरे, लोहिया जी की आत्मा यहां रहती है। लोहिया जी का नाम लेकर आप राजनीति करते हो, लेकिन समाजवादी पार्टी के लोगों को लोहिया जी जब स्वर्ग से कभी देखते होंगे, नीचे की तरफ आचार्य नरेंद्र देवजी, लोहियाजी, दत्तोपंतजी, मदन मोहनजी सोचते होंगे कि समाजवादी लोगों ने जिस ढंग से 'धनिकति बंटकर रहेगी, भूखी जनता अब न रहेगी' का नारा लगाने का काम किया था, ये समाजवादी पार्टी के लोग पूंजीवादी व्यवस्था के साथ हाथ मिलाकर सवई में फिल्मी कलाकारों का डांस देखने का काम करते हैं।
जिनके साथ खड़े होते हैं, उनकी आत्मा रोती होगी
पूंजीपतियों के साथ खड़े होते हैं, उनकी आत्मा रोती होगी। इसलिए मैं कह सकता हूं कि वास्तव में समाजवादी व्यवस्था को अगर किसी ने आगे बढ़ाने का काम किया है तो माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के आधार पर योगी आदित्यनाथ ने जन-जन की सेवा करके दिखाने का काम किया है।
आज मुझे गर्व है कहने में कि हर गरीब को पक्का मकान, सबको बिजली, सबको स्वच्छ पेयजल, सबको इलाज, सबको स्कूल की व्यवस्था, सबको पढ़ाई—ये कौन कहता था? 'मुख्य पढ़ाई होगी, मुख्य दवाई होगी, मुख्य सिंचाई होगी।' उसको धरातल पर उतारने का काम माननीय योगी आदित्यनाथ जी की सरकार ने करके दिखाने का काम किया है।
एक बार जरा अपने गिरेबान में झांको, समाजवादी पार्टी के लोगों। आप किसी पर एक उंगली उठाते हो तो तीन उंगलियां आपकी तरफ जाती हैं। मैं सच्चाई प्रदेश की जनता के समक्ष रखना चाहता हूं और सीधी तुलनात्मक अध्ययन के साथ आपके समक्ष आऊंगा।
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- डॉक्टर आलोक श्रीवास्तव, प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ यूरोलॉजी
- डॉक्टर अजय कुमार वर्मा, प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ रेस्पिरेटरी मेडिसिन
- डॉक्टर ऋचा चौधरी, प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन
- डॉक्टर आशीष चंद्र अग्रवाल, एडिशनल प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ ईएनटी
- डॉक्टर रश्मि कुमारी, एडिशनल प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन
- डॉक्टर मिली सेंगर, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन
- डॉक्टर आयुषी वैद्य, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ पीडियाट्रिक सर्जरी
- डॉक्टर पद्मनिधि अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ डेंटिस्ट्री
- डॉक्टर शिवम वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ फिजियोलॉजी
इनके अलावा डायरेक्टर्स मेरिट अवार्ड इन नर्सिंग के लिए उमा पांडेय और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड इन नर्सिंग के लिए सीएनओ सुमन सिंह को सम्मानित किया गया।
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लोहिया संस्थान की एनुअल रिपोर्ट और 2 पुस्तकों का सीएम योगी आदित्यनाथ, स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और निदेशक स्वास्थ सीएम सीएम सिंह ने विमोचन किया।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने बटन दबाकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट का लोकार्पण किया। इसके साथ ही इमरजेंसी के 40 वार्ड के नए वार्ड का भी लोकार्पण हो गया। कैथ लैब समेत अन्य जांच सुविधाओं की नई मशीनें भी शुरू हो गईं।
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स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने मेडिकोज से पूछा- 6 साल में बच्चा कितना बड़ा होता है? उसकी पढ़ाई शुरू होती है। लेकिन, ये गति कौन सी है कि 6 साल में आपने इसे इतना बड़ा संस्थान बना दिया। बच्चों नंबर के साथ स्किल भी जरूरी है। तभी आप दुनिया जीत पाओगे।
लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान से चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल भी आएगा। ये मैं यहां के रिसर्च पेपर देखकर कह सकता हूं। आज छठे बर्थडे पर ये प्रतिज्ञा करिए कि कोई भी मरीज आएगा तो चिपट कर उसकी सेवा करेंगे। उसका इलाज करेंगे। किसी अपने प्रोफेसर से कहता कि अपने बच्चों को ढेर सारे नंबर देना। अपने ज्ञान को सीमित में नहीं रखना चाहते।
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मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा- जब ये संस्थान शुरू हुआ था तब यके महज 20 बेड का अस्पताल था। आज ये 1400 बेड का अस्पताल है। बहुत जल्द 2800 बेड का अस्पताल बनेगा। मुझे उम्मीद है कि अगले 5 साल में 5000 बेड का आकंड़ा भी पूरा होगा।
पिछले छह वर्षों में लोहिया संस्थान ने तेजी से प्रगति की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संस्थान में करीब 1400 बेड संचालित हैं। नए प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद यह संख्या करीब 2800 तक पहुंच जाएगी।
संस्थान में 1010 बेड के अस्पताल, 350 बेड के ट्रॉमा सेंटर और पीएम-अभिम योजना के तहत 100 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट पर काम हो रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधा मिलेगी।
आने वाले समय में संस्थान को 2800 बेड से बढ़ाकर 5000 बेड तक ले जाने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। उन्होंने लोहिया संस्थान की छह वर्षों की प्रगति की सराहना भी की।
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लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक सीएम सिंह ने बताया- डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती के बाद चिकित्सा सेवाओं का विस्तार हुआ है। संस्थान में रोज करीब 5 हजार ओपीडी मरीज और 600 इमरजेंसी मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
पिछले साल संस्थान में 10 लाख से ज्यादा ओपीडी कंसल्टेशन हुए। इस दौरान 85 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हुए, जबकि 40 हजार से ज्यादा मेजर और माइनर सर्जरी की गईं। संस्थान प्रशासन के मुताबिक ये आंकड़े मरीजों के बढ़ते भरोसे को दिखाते हैं।
600 रोबोटिक सर्जरी हुईं
वर्ष 2025-26 में रोबोटिक सर्जरी का भी विस्तार हुआ। अब तक करीब 600 सर्जरी रोबोट की मदद से की जा चुकी हैं। संस्थान में प्रदेश का दूसरा रोबोटिक लिवर ट्रांसप्लांट भी किया गया। इस वर्ष कुल 29 लिवर ट्रांसप्लांट हुए हैं। इसी दौरान करीब 72 हजार प्रसव भी कराए गए।
23 हजार मरीजों का मुफ्त इलाज
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत करीब 205 करोड़ रुपये की मदद से 23 हजार मरीजों का मुफ्त इलाज किया गया। इनमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना, असाध्य रोग योजना, आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष शामिल हैं।
बेड पर क्यूआर कोड से शिकायत की सुविधा
मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए संस्थान में बेड साइड क्यूआर कोड आधारित शिकायत और सुझाव व्यवस्था शुरू की गई है। इसके जरिए मरीज और तीमारदार इलाज से जुड़ी समस्या या अपना सुझाव दे सकते हैं।
राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में नए ट्रॉमा सेंटर के बनने से गंभीर दुर्घटना और अन्य गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता बढ़ेगी। संस्थान प्रशासन के मुताबिक यह प्रदेश का दूसरा लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर होगा।
संस्थान को द इकोनॉमिक टाइम्स की ओर से हॉस्पिटल ऑफ द ईयर-नर्सिंग एक्सीलेंस पुरस्कार भी मिला है। संस्थान में हर साल 200 एमबीबीएस, 100 एमडी/एमएस, 40 डीएम/एमसीएच और चार डीएनबी सीटों पर दाखिला होता है। बीएससी नर्सिंग और विभिन्न पैरामेडिकल कोर्स भी संचालित हैं। पिछले साल शुरू हुए पीजी कोर्स में 450 छात्र पढ़ रहे हैं।
148 रिसर्च प्रोजेक्ट और चार पेटेंट
वर्ष 2025-26 में संस्थान में 148 परियोजनाएं और 20 स्कीम कार्यक्रम संचालित किए गए। इससे करीब 12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त शोध फंड मिला। शोधकर्ताओं ने इस साल चार पेटेंट हासिल किए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने देशभर से 16 संस्थानों को टेक्निकल रिसोर्स सेंटर के लिए चुना है। इनमें लोहिया संस्थान भी शामिल है। डब्ल्यूएचओ के सहयोग से प्रदेश में लेड टॉक्सिसिटी पर अध्ययन किया जा रहा है।
650 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति
वर्ष 2025-26 में 650 नर्सिंग अधिकारियों और 194 तकनीकी कर्मचारियों को नियुक्ति दी गई। इससे चिकित्सा, नर्सिंग, तकनीकी सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। संस्थान को दूसरी बार एनएबीएच एक्रेडिटेशन भी मिला है। संस्थान प्रशासन के मुताबिक पब्लिक सेक्टर में यह उपलब्धि हासिल करने वाला संस्थान प्रदेश का प्रमुख संस्थान है।
10 जिलों में हार्ट अटैक के मरीजों को तुरंत इलाज
स्टेमी केयर कार्यक्रम के तहत 10 जिलों को स्मोक एंड हब के जरिए जोड़ा गया है। इससे हार्ट अटैक के मरीजों को समय पर उपचार देने की व्यवस्था की गई है। उन्नत भारत अभियान के तहत पांच गांव भी गोद लिए गए हैं। यहां स्वास्थ्य जागरूकता और प्रशिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं।
राज्यपाल की प्रेरणा से एक बालिका संरक्षण गृह को भी गोद लिया गया है। यहां कंप्यूटर लैब, एचपीवी वैक्सीनेशन, वेलनेस गतिविधियां और मानसिक परामर्श की सुविधा दी जा रही है। वहीं, पौधरोपण अभियान में संस्थान के कर्मचारियों ने करीब 10 हजार पौधे लगाए हैं।
1010 बेड का अस्पताल और 100 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक
आगे संस्थान में 1010 बेड का ब्रॉड स्पेशलिटी अस्पताल, 100 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 510 बेड की पब्लिक रिलेशन एकॉमोडेशन, मल्टीलेवल पार्किंग, बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल, नर्सिंग कॉलेज और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना है।
सुपर स्पेशलिटी विभागों और इमरजेंसी में बेड बढ़ाने के साथ न्यूरोसाइंसेस सेंटर और क्रिटिकल केयर ब्लॉक शुरू करने पर भी काम होगा। स्वीकृत 1085 नए पदों पर पारदर्शी तरीके से भर्ती की जाएगी। इसके अलावा बर्न एंड प्लास्टिक्स, सर्जरी, रिप्रोडक्टिव मेडिसिन और जेरियाट्रिक केयर सेंटर शुरू करने की भी तैयारी है।
संस्थान प्रशासन का लक्ष्य मरीजों की देखभाल, पढ़ाई, शोध और नई तकनीक के क्षेत्र में लोहिया संस्थान को देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल करना है।
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सबसे पहले ACS मेडिकल एजुकेशन अमित कुमार घोष ने बोलना शुरू किया। उन्होंने कहा- आज यह संस्थान रोगी देखभाल के साथ बुनियादी ढांचे पर भी व्यापक रूप से कार्य कर रहा है। 1010 बेड वाले अस्पताल तथा 350 बेड वाले ट्रॉमा सेंटर का निर्माण जैसी परियोजनाएं प्रक्रिया में हैं। 100 बेड वाले क्रिटिकल केयर अस्पताल का निर्माण संस्थान की भविष्य में क्षमता को सुदृढ़ करेगा। विशेष रूप से 444 बेड के पुरुष छात्रावास और उतने ही 444 बेड के महिला छात्रावास का निर्माण भी हमारे शैक्षणिक परिवेश को मजबूत करेगा।
NABH एक्रेडिटेशन रोगी सुरक्षा और गुणवत्ता सुधार की ओर यह संस्थान लगातार काम कर रहा है। मैं संस्थान के षष्ठम स्थापना दिवस के इस गरिमामय कार्यक्रम में हमारे बीच में पधारे मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, राज्यमंत्री और सभी अतिथियों का स्वागत करता हूं।
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सीएम योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम में शाम 4 बजे पहुंचे। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद हैं।
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शनिवार को संस्थान में छठा वार्षिक अनुसंधान दिवस मनाया गया। एक साल में चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने 86 शोध प्रस्तुत किए और 12 किताबें प्रकाशित कीं। विभिन्न विभागों को पांच पेटेंट भी मिले। कार्यक्रम में गांधीनगर के निदेशक डॉ.दीपक बी. सक्सेना और डॉ.अमित कौशिक समेत विशेषज्ञों ने शोध और चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धियों पर विचार साझा किए।
डॉ.अमित कौशिक ने बताया कि डायबिटीज का असर आंखों पर भी पड़ सकता है। इससे मोतियाबिंद और रेटिना से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। समय पर जांच कराने से बीमारी का पता जल्दी चल सकता है और रोशनी बचाने में मदद मिल सकती है।
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स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री 194 टेक्निकल संवर्ग के कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र भी देंगे। इससे पहले इसी साल संस्थान में 650 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। पिछले साल 150 नए फैकल्टी सदस्यों को संस्थान से जोड़ा गया था। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह भी मौजूद रहेंगे।
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