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गोरखपुर के एनेक्सी भवन को चट कर रही दीमक! 1532.38 लाख रुपये हुए थे खर्च, चौराहे भी हुए 'बदरंग'

गोरखपुर के एनेक्सी भवन को चट कर रही दीमक! 1532.38 लाख रुपये हुए थे खर्च, चौराहे भी हुए 'बदरंग' अधिकारी अब अपनी कमी छुपाने के लिए नए सिरे से फिर टेंडर करके यहां पर नई फ्लोरिंग लगाने की जुगत में हैं. By ETV Bharat Uttar Pr…

ETV Bharat के अनुसार22 सितंबर 2026 को 06:04 pm बजे
गोरखपुर के एनेक्सी भवन को चट कर रही दीमक! 1532.38 लाख रुपये हुए थे खर्च, चौराहे भी हुए 'बदरंग'

सौजन्य से:- ETV Bharat

गोरखपुर के एनेक्सी भवन को चट कर रही दीमक! 1532.38 लाख रुपये हुए थे खर्च, चौराहे भी हुए 'बदरंग'

अधिकारी अब अपनी कमी छुपाने के लिए नए सिरे से फिर टेंडर करके यहां पर नई फ्लोरिंग लगाने की जुगत में हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : September 22, 2026 at 8:05 PM IST

गोरखपुर : गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शहर है. यहां पिछले 9 साल में एक लाख करोड़ से ज्यादा की परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा रही हैं. तमाम परियोजनाओं का लोकार्पण भी हो चुका है. लेकिन इन्हीं परियोजनाओं में तमाम परियोजनाएं ऐसी भी हैं जो गुणवत्ता पर सवाल भी खड़ा कर रही हैं. जिस एनेक्सी भवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर अपने विधायकों और अधिकारियों के साथ विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक करते हैं. उसकी दीवार और फ्लोर लकड़ी से बनाई गई है. पूरी दीवार और फ्लोर को दीमक चाट गए हैं.

तीन से चार साल पहले लकड़ी के इस फ्लोरिंग और वॉल का कार्य PWD ने 1532.38 लाख रुपये में कराया था. अधिकारी अब अपनी कमी छुपाने के लिए नए सिरे से फिर टेंडर करके यहां पर नई फ्लोरिंग लगाने की जुगत में हैं. लेकिन इस भ्रष्टाचार और कमी को लेकर न तो ठेकेदार और न ही कार्यदाई संस्था के खिलाफ अभी तक कोई एक्शन हुआ है.

एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि अगर तुलना की जाए तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण को बने कम से कम 20 साल हो गए हैं. उसकी फ्लोर और दीवार की लकड़ी को आज तक दीमक नहीं काट पाए. आखिर किस गुणवत्ता की लकड़ी यहां लगाई गई थी कि वह तीन-चार साल भी नहीं टिकी. शहर के सभी प्रमुख चौराहों के सुंदरीकरण का कार्य हुआ जिसे नगर निगम और लोक निर्माण विभाग में कराया. इन चौराहों पर जयप्रकाश नारायण, डॉ. आंबेडकर, लाल बहादुर शास्त्री जैसे लोगों की प्रतिमाएं लगाई गई है, लेकिन सालभर भी मुख्यमंत्री के हाथों से उद्घाटन का नहीं हुआ कि यहां के फ्लोर की मार्बल, टाइल्स टूटकर बिखर चुकी है और फाउंटेन से पानी भी नहीं निकलता.

यही हाल है 23 अप्रैल 2026 को राप्ती नदी के तट पर बनाए गए इको पार्क की, जहां के कैंटीन और वाटर सप्लाई सिस्टम से जुड़ी हुई बिल्डिंग क्रेक हो चुकी है. टोटियां गायब हो चुकी हैं और फर्श पर लगे मार्बल टूट चुके हैं. शहर के चौराहों से तो यह गुजरते भी हैं लेकिन इन्हें यह सब दिखाई ही नहीं देता. जबकि आम जनता को यह भ्रष्टाचार बहुत स्पष्ट दिखाई देता है.

मामले में जिलाधिकारी और नगर आयुक्त दोनों बोलने को तैयार नहीं. दबे जुबान से यही कहते हैं कि जो कमियां दिखेंगीं वह जीर्णोद्धार के साथ ठीक कर दी जाएगी. लेकिन सवाल उठता है कि सालभर के भीतर लाखों और करोड़ों की परियोजना इस तरह से बर्बाद रही हो और इसका कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है.

संयुक्त व्यापार मंडल गोरखपुर के अध्यक्ष नितिन जायसवाल ने बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शहर को संवारना चाहते हैं. विकास की गति तेज कर दिए हैं. लेकिन जिस तरह से सड़कों का बुरा हाल है. चौराहे और तमाम परियोजनाओं में टूट की स्थिति नजर आ रही है. एनेक्सी भवन की दीवार और फर्श को दीमक खा रहा है. वह साफ बताता है कि भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर है.

उन्होंने इसके लिए शहर के जनप्रतिनिधियों सांसद और विधायकों को भी जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इन्हें मुख्यमंत्री के परियोजनाओं पर आगे बढ़कर निगरानी करनी चाहिए. लेकिन मुझे लगता है कि भ्रष्टाचार में सब के सब लिप्त हैं और मुख्यमंत्री की छवि खराब कर रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ता संजय मिश्रा कहते हैं कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में अगर इस तरह का भ्रष्टाचार दिखाई दे रहा है तो समझ सकते हैं कि गांव देहात में किस तरह की स्थिति होगी.

बड़ी भ्रष्टाचार की एक घटना गोरखपुर में करीब 20 दिन पहले घटी. सिंचाई विभाग के द्वारा राप्ती नदी के तट पर निर्माण किए गए गजीबो के गिर जाने से उसके नीचे दबकर दो अधिवक्ताओं की मौत हो गई. मामला अधिवक्ताओं से जुड़ा हुआ था प्रशासन अपनी गर्दन बचाना चाह रहा था ऐसी स्थिति में तत्काल गजीबों गिरने की घटना को बिजली कड़कने और उसके गजीबो पर गिरने से जोड़ दिया गया.

इस घटना को लेकर अधिवक्ताओं के बड़े आंदोलन के आगे प्रशासन ने अपनी जांच अब इस दिशा में मोड़ दिया है कि क्या निर्माण में कोई खामी तो नहीं थी. जिसकी वजह से यह गिरा. वहीं इसकी गुणवत्ता अगर खराब नहीं थी तो अब प्रशासन ने ऐसी जगह पर लोगों को जाने और वहां खड़ा होने से मना करने का बोर्ड लगा दिया है. जिला प्रशासन अंदर खाने व्यवस्था बनाकर सिंचाई विभाग के द्वारा जो मौके पर जर्जर और मानक विहीन निर्माण दिखाई दे रहा है, उसे तोड़कर फिर से बनाये जाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दिया है.

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