वाराणसी-गया समेत 11 एयरपोर्ट्स प्राइवेट हाथों में सौंपने की तैयारी, पिछली बार अडानी के खाते में गए थे सारे हवाई अड्डे
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमिटी (PPPAC) ने 4 अगस्त को हुई बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। इन एयरपोर्ट्स को PPP मॉडल के तहत 50 साल की अवधि के लिए लीज पर दिया जाएगा। माना जा…

सौजन्य से:- Navbharat Times
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमिटी (PPPAC) ने 4 अगस्त को हुई बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। इन एयरपोर्ट्स को PPP मॉडल के तहत 50 साल की अवधि के लिए लीज पर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि प्राइवेट ऑपरेटर्स इन 11 एयरपोर्ट्स में लगभग ₹8,622 करोड़ का इन्वेस्टमेंट करेंगे।
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कितने का होगा निवेश?
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक भुवनेश्वर-हुबली बंडल में सबसे ज्यादा ₹2,725 करोड़ के इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। इसके बाद वाराणसी-गया-कुशीनगर बंडल में ₹2,467 करोड़ का इन्वेस्टमेंट होगा। रायपुर-औरंगाबाद के लिए ₹1,496 करोड़, तिरुचिरापल्ली-तिरुपति के लिए ₹1,411 करोड़ और अमृतसर-कांगड़ा के लिए ₹523 करोड़ की जरूरत है।इस इन्वेस्टमेंट में कंसेशनेयर्स द्वारा किया जाने वाला कैपिटल एक्सपेंडिचर शामिल होगा। इसमें एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा पहले से मंजूर किया गया खर्च और क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी अतिरिक्त खर्च भी शामिल हैं। मंजूर किए गए कैपेक्स का काम कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने के तीन साल के भीतर पूरा करना होगा।
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पिछली बार से सबक
मिनट्स के अनुसार, आगे का विस्तार एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी के नियमों के तहत ट्रैफिक और क्षमता की सीमाओं से जुड़ा होगा। सरकार एक ही बोली लगाने वाले को मिलने वाले एयरपोर्ट बंडलों की संख्या सीमित करके एकाधिकार को रोकने की भी कोशिश कर रही है। मिनट्स में कहा गया है, 'एक ही बोली लगाने वाले को दिए जाने वाले एयरपोर्ट बंडलों की संख्या सीमित की जाएगी।'इसमें मार्केट में एकाधिकार और जरूरत से ज्यादा कर्ज (ओवर-लीवरेजिंग) के जोखिमों का हवाला दिया गया है। इस सीमा (कैप) के तौर-तरीकों पर अभी काम चल रहा है। यह कदम सरकार के 2019 के एयरपोर्ट प्राइवेटाइज़ेशन राउंड के बाद उठाया गया है, जब अडानी ग्रुप ने पेश किए गए सभी छह एयरपोर्ट्स के लिए बोली जीती थी।
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