उत्तर प्रदेश में हर माह 100 करोड़ रुपए साइबर फ़्राड?, क्राइम रोकने में 14 बड़े बैंक बरत रहे लापरवाही!
उत्तर प्रदेश में हर माह 100 करोड़ रुपए साइबर फ़्राड?, क्राइम रोकने में 14 बड़े बैंक बरत रहे लापरवाही! By राजेंद्र कुमार | Updated: September 14, 2026 17:22 IST2026-09-14T17:21:22+5:302026-09-14T17:22:28+5:30 साइबर क्राइम…

सौजन्य से:- Lokmat News Hindi
उत्तर प्रदेश में हर माह 100 करोड़ रुपए साइबर फ़्राड?, क्राइम रोकने में 14 बड़े बैंक बरत रहे लापरवाही!
By राजेंद्र कुमार | Updated: September 14, 2026 17:22 IST2026-09-14T17:21:22+5:302026-09-14T17:22:28+5:30
साइबर क्राइम महानिदेशक ने साइबर ठगों को पकड़ने के लिए गत 5 अगस्त को बैंकों को सीबीएस एक्सेस और जरूरी आईटी संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में हर महीने 100 करोड़ रुपए का साइबर फ़्राड हो रहा है. बीते सात महीनों में ढाई लाख से अधिक साइबर फ़्राड की शिकायते दर्ज हुई हैं और सिर्फ 1040 मामलों में ही एफआई दर्ज कर करीब 1957 आरोपियों हो ही पुलिस पकड़ सकी है. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग के इन हैरान करने वालों आंकड़ों के साथ ही यह भी पता चला है कि राज्य में साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (सीएफएमसी) की व्यवस्था 14 बड़े बैंकों की लापरवाही से प्रभावित हो रही है.
इसकी वजह है, इन 12-14 बैंकों ने सीएफएमसी में तैनात अपने प्रतिनिधियों को कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) का एक्सेस नहीं दिया है. जबकि छह बैंकों ने अपने प्रतिनिधियों को लैपटॉप तक उपलब्ध नहीं कराया है. इस कारण साइबर ठगी के मामलों में खातों की तत्काल जांच और रकम रोकने की कार्रवाई बुरी तरह से प्रभावित हो रही है. साइबर ठगी करने वाले साइबर ठगों को बचने का मौका मिल जा रहा है.
गृह विभाग ने इन बैंकों को दिया निर्देश
हाल ही में गृह विभाग को प्राप्त हुई बैंकों की एक समीक्षा रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है. गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार, साइबर क्राइम महानिदेशक ने साइबर ठगों को पकड़ने के लिए गत 5 अगस्त को बैंकों को सीबीएस एक्सेस और जरूरी आईटी संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे.
इस निर्देश के एक माह बाद भी भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, इंडियन बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आईडीबीआई बैंक, बंधन बैंक, यस बैंक और उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक ने सीबीएस एक्सेस नहीं दिया.
जबकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, आईडीबीआई बैंक और बंधन बैंक ने अपने प्रतिनिधियों को लैपटॉप नहीं दिए. इस वजह से साइबर ठगों को पकड़े के लिए बनाया गया सिस्टम प्रभावित हो रहा है. हालांकि प्रदेश में सीएफएमसी और 1930 हेल्पलाइन के नए केंद्र की शुरुआत 1 जून 2026 को हुई थी,
लेकिन 14 बैंकों द्वारा बरती जा रही लापरवाही के कारण साइबर क्राइम को रोकने और साइबर ठगी करने वाले लोगों को पकड़ने का कार्य तेजी नहीं पकड़ पा रहा है. गृह विभाग के अफसरों का कहना है कि साइबर ठगी करने वाले ठग कुछ ही मिनटों में ठगी गई धनराशि को कई खातों में घुमा देते हैं. ऐसे में साइबर ठगी के हर मामले में तत्काल बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच अहम है.
और इसके लिए सीएफएमसी का मजबूत होना जरूरी है. सीएफएमसी में बैंक प्रतिनिधि की भूमिका अहम होती है. इस सिस्टम में कार्यरत बैंक प्रतिनिधि साइबर ठगी की शिकायत मिलते ही संदिग्ध खाते की जांच करते हैं. ठगी की रकम पर तत्काल रोक लगाना और ठगी गई धनराशि को दूसरे खाते में जाने से पहले उसे फ्रीज करना इन प्रमुख दायित्व होता है.
इसके साथ ही ही बैंक के प्रतिनिधि साइबर ठगी के लेनदेन की त्वरित जांच करते हुए पुलिस तथा बैंक के बीच समन्वय स्थापित करते हैं. ताकि साइबर ठगी करने वाले अपराधी को पकड़ा जा सके. लेकिन यह कार्य 14 बड़े बैंकों की लापरवाही से प्रभावित हो राह है. फिलहाल गृह विभाग के अफसरों ने इस मामले में 14 बैंकों के आला अफसरों के एक सप्ताह के भीतर ही बैंक के प्रतिनिधियों को सीबीएस का एक्सेस और लैपटॉप देने का निर्देश दिया है.
सीएफएमसी का कार्य
- साइबर फ़्राड के मामलों पर अंकुश लगाने और साइबर ठगों को पकड़ने के बने सीएफएमसी का मुख्य कार्य साइबर ठगी के मामले की शिकायत मिलते ही ठगी की रकम पर तत्काल रोक लगाना है.
- इसके साथ ही सीएफएमसी पुलिस, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करता है.
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