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यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव, BSP हो जाएगी जीरो, बाकी दलों के बीच किसमें कितना दम?

उत्तर प्रदेश के 10 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। इससे पहले 16 अक्टूबर को इन सीटों के लिए चुनाव होना है। इन सांसदों का कार्यकाल खत्म होने के साथ बहुजन समाज पार्टी विधानसभा के बाद संसद में भी जीर…

Navbharat Times के अनुसार22 सितंबर 2026 को 01:04 pm बजे
यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव, BSP हो जाएगी जीरो, बाकी दलों के बीच किसमें कितना दम?

सौजन्य से:- Navbharat Times

उत्तर प्रदेश के 10 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। इससे पहले 16 अक्टूबर को इन सीटों के लिए चुनाव होना है। इन सांसदों का कार्यकाल खत्म होने के साथ बहुजन समाज पार्टी विधानसभा के बाद संसद में भी जीरो पर पहुंच जाएगी।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक माह से भी कम समय बाद 16 अक्टूबर को राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। यूपी के 10 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म होने वाला है। इससे इन सीटें पर चुनाव हो रहा है। यूपी कोटे के मौजूदा 10 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो जाएगा। इनमें से 8 सांसद बीजेपी के, एक समाजवादी पार्टी का और एक बीएसपी का है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या राज्यसभा की 10 सीटों पर अब इन्हीं तीन दलों के नेता जाएंगे, या फेरबदल होगा। विधानसभा के गणित के हिसाब से यह तो तय है कि बीएसपी नवंबर में राज्यसभा में जीरो पर पहुंच जाएगी। बीजेपी और सपा में मुकाबला होगा। इस चुनावी गणित को सरसरी नजर से देखें तो आठ सीटें बीजेपी को मिल सकती हैं और समाजवादी पार्टी एक सीट की बढ़त हासिल करके दो पर पहुंच सकती है।

इन 10 सांसदों का खत्म हो रहा कार्यकाल

बीजेपी के आठ राज्यसभा सदस्यों बृजलाल, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बीएल वर्मा और सीमा द्विवेदी का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसके अलावा बीजेपी के डॉ दिनेश शर्मा इस्तीफा दे चुके हैं। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है।

बीएसपी अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच रही

खास बात यह है कि बीएसपी के रामजी गौतम का राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल खत्म होने से बहुजन समाज पार्टी अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच जाएगी। वह राज्यसभा में शून्य पर पहुंच जाएगी, क्योंकि गौतम ही उसके एक मात्र सांसद हैं। बहुजन समाज पार्टी का यूपी में अब न तो कोई विधायक है, न ही कोई एमएलसी है। राज्यसभा चुनाव के गणित के हिसाब से उसे कोई सीट मिलना असंभव है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में अगले साल फरवरी-मार्च में होने वाले चुनाव में वह एक ऐसी पार्टी होगी, जो पहले भले ही तीन बार यूपी में सरकारें बना चुकी हो, पर अब वह जीरो पर होगी।

मुकाबला बीजेपी और समाजवादी पार्टी का

यूपी के होने वाले राज्यसभा चुनाव की दौड़ से बहुजन समाज पार्टी बाहर हो चुकी है। अब मुकाबले में मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) है। उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों में से छह सीटें रिक्त हैं। विधानसभा में कुल 397 विधायक हैं। इनमें से जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कुल 294 विधायक हैं। इनमें बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। दूसरी तरफ विपक्षी दलों में समाजवादी पार्टी के 101 और कांग्रेस के 2 विधायक हैं। इसके अलावा जनसत्ता दल के 2 विधायक हैं।

प्रत्येक सीट के लिए 37 विधायकों के वोट जरूरी

यूपी विधानसभा के 397 विधायक ही राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव में मतदान करेंगे। राज्यसभा की प्रत्येक सीट के लिए कोटा [कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1)] + 1 के फॉर्मूले के आधार पर तय होता है। यूपी विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर राज्यसभा की एक सीट के लिए 37 मतों की आवश्यकता होगी। बीएसपी इस चुनाव में मतदाता नहीं होगी।

बीजेपी अपनी स्थिति बरकरार रखने में सक्षम

बीजेपी के पास एनडीए के कुल 294 विधायक हैं। यदि उसे प्रथम वरीयता के यह सभी वोट मिल जाते हैं तो उसे आठ सीटें जीतने के लिए दो वोट कम पड़ेंगे। कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भले ही एनडीए में नहीं हैं, लेकिन वे बीजेपी के साथ हैं। उनके सहित उनकी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो विधायक हैं। यह दो विधायक यदि बीजेपी या एनडीए के उम्मीदवारों को वोट देते हैं, तो बीजेपी को आठ सीटें मिलना तय है। यानी बीजेपी की यूपी से राज्यसभा में उपस्थिति पूर्ववत ही रह सकती है।

सपा को मिल सकती है एक सीट की बढ़त

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के पास 101 विधायक हैं। ऐसे में वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है। तीसरी सीट वह कांग्रेस के दो विधायकों के समर्थन से भी हासिल नहीं कर सकेगी। खतरा विधायकों के टूटने की भी रहेगा। बीजेपी अवश्य ही विपक्ष के कुछ विधायकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकती है। यदि वह अपना गणित जमाने में कामयाब होती है तो वह एक सीट बढ़ा भी सकती है।

लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।

सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।

सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।

पत्रकारिता अनुभव

सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।

सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।

सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।

अवॉर्ड/अचीवमेंट्स

बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें

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