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चीनी की कीमतों पर चौतरफा घिरी योगी सरकार, चुनावों पर पड़ सकता है असर

चीनी की कीमतों पर चौतरफा घिरी योगी सरकार, चुनावों पर पड़ सकता है असर देश में चीनी कीमतों में अचानक हुई बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है. किसानों ने सरकार को चेतावनी दी है कि इसका असर आगामी चुनाव में देखने को म…

ABP News के अनुसार25 अगस्त 2026 को 04:55 am बजे
चीनी की कीमतों पर चौतरफा घिरी योगी सरकार, चुनावों पर पड़ सकता है असर

सौजन्य से:- ABP News

चीनी की कीमतों पर चौतरफा घिरी योगी सरकार, चुनावों पर पड़ सकता है असर

देश में चीनी कीमतों में अचानक हुई बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है. किसानों ने सरकार को चेतावनी दी है कि इसका असर आगामी चुनाव में देखने को मिलेगा. वहीं, विरोधी दल भी हमलावर हैं.

उत्तर प्रदेश में चीनी के बढ़ते दाम अब सिर्फ महंगाई का मुद्दा नहीं रह गए हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गन्ना किसान, चीनी मिलें और घरेलू बजट के साथ सियासी मुद्दा बनता जा रहा है. किसान संगठन गन्ने का रेट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जबकि विपक्ष महंगी चीनी को लेकर सरकार को घेर रहा है. किसानों का कहना है इस मंहगाई का हर्जाना यूपी सरकार को 2027 के विधानसभा में भुगतना पड़ेगा.

उत्तर प्रदेश में करीब 121 चीनी मिलों में 2025-26 के पेराई सत्र के दौरान गन्ने की पेराई हुई. इन मिलों से जुड़े किसान परिवार पश्चिमी यूपी से लेकर अवध और पूर्वांचल तक फैले हैं. इसलिए चीनी का मुद्दा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है.

पश्चिमी यूपी में सबसे बड़ा राजनीतिक असर

चीनी और गन्ने के दाम का सबसे सीधा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दिखाई दे सकता है. मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बिजनौर, सहारनपुर, हापुड़, अमरोहा, मुरादाबाद और आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं.

इन इलाकों की विधानसभा सीटों पर गन्ने का रेट हमेशा चुनावी मुद्दा रहा है. किसान अगर गन्ने के भुगतान, रेट और लागत को लेकर नाराज होता है तो उसका असर सिर्फ किसान परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे ग्रामीण वोट बैंक पर पड़ता है.

किसान बोले- चीनी 70 तो गन्ना 700

भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष आलोक वर्मा ने कहा है कि यदि बाजार में चीनी करीब 70 रुपये किलो बिक रही है तो किसानों को गन्ने का भाव भी बढ़ाकर 700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए. जब चीनी करीब 40 रुपये किलो थी, तब गन्ने का रेट लगभग 400 रुपये प्रति क्विंटल था. अब चीनी महंगी होने पर किसानों को उसका फायदा क्यों नहीं मिलना चाहिए? किसान नेता ने चीनी मिलों को मिलने वाले राहत पैकेज का हवाला देते हुए किसानों के लिए भी राहत की मांग की है.

चीनी के दाम को लेकर आलोक वर्मा ने दावा किया कि इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि चीनी, तेल, रिफाइंड, आटा और खाद समेत रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी से आम जनता परेशान है. किसान खाद के लिए लाइनों में लग रहा है और उसे महंगे दाम पर खाद मिल रही है. इस बार सरकार की 'मिठास' चुनाव में 'खटास' में बदल सकती है.

चीनी की महंगाई के कई कारण

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला ने चीनी के दाम बढ़ने के पीछे केवल एक कारण मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की नीतियों और महंगाई का असर चुनाव पर पड़ता है. उत्तर प्रदेश में गन्ना किसान चुनावी राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं. किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता तो उनकी नाराजगी बढ़ती है. दूसरी तरफ आम उपभोक्ता को महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है तो उसकी नाराजगी भी सरकार के खिलाफ जा सकती है.

ज्ञानेंद्र शुक्ला के मुताबिक चीनी उत्पादन वाले प्रमुख राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में मौसम का भी असर पड़ा है. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कम बारिश और फसल से जुड़ी समस्याओं का असर गन्ने के उत्पादन पर पड़ा है. चीनी की महंगाई का असर सिर्फ किसान पर नहीं बल्कि घर के बजट पर भी पड़ता है. यही वजह है कि 2027 में चीनी की महंगाई का मुद्दा महिला वोटरों तक भी पहुंच सकता है.

एथेनॉल को लेकर भी बहस

चीनी की कमी के बीच एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. इस पर ज्ञानेंद्र शुक्ला का कहना है कि हालांकि सरकार की ओर से इस बात को खारिज किया गया है कि एथेनॉल के लिए बड़ी मात्रा में चीनी का इस्तेमाल होने से मौजूदा संकट पैदा हुआ है. सरकार के मुताबिक कुल उत्पादित चीनी का करीब 9 फीसदी हिस्सा ही एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होता है. सरकार अब स्थिति संभालने के लिए कई कदम उठा रही है. इसमें बाहर से चीनी मंगाना, जमाखोरी पर कार्रवाई और बाजार में आपूर्ति बनाए रखने जैसे कदम शामिल हैं.

सपा ने सरकार पर लगाए आरोप

समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पूजा शुक्ला ने कहा कि चीनी बुनियादी चीज है. कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो चीनी का इस्तेमाल न करता हो, तो ज़ाहिर सी बात है कि चीनी के दाम बढ़ने से जो सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है, वो गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को हुआ है. महंगी चीनी होने की वजह से त्योहारों पर मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

सपा नेता ने कहा कि मंहगाई का बहुत बड़ा असर मार्केट में भी देखने को मिलेगा. वहीं दूसरी तरफ गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा. इस सरकार में न किसान खुश है, न आम आदमी खुश है. सरकार कोई समस्या की पहले से जानकारी थी. सरकार ने किसी भी प्रकार का मैनेजमेंट नहीं किया और सरकार के खराब मैनेजमेंट की वजह से आज किसान भी परेशान हैं.

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