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यूपी का एक ऐसा पुस्तक मेला जहां किलो के भाव में साहित्य, मोटिवेशनल किताबें भी तौलकर लीजिए

यूपी का एक ऐसा पुस्तक मेला जहां किलो के भाव में साहित्य, मोटिवेशनल किताबें भी तौलकर लीजिए 'वेबली बॉक्स' बुक फेयर का आज अंतिम दिन, युवाओं ने बढ़चढ़ कर खरीदी किताबें. By ETV Bharat Uttar Pradesh Team Published : August 26,…

ETV Bharat के अनुसार26 अगस्त 2026 को 07:22 am बजे
यूपी का एक ऐसा पुस्तक मेला जहां किलो के भाव में साहित्य, मोटिवेशनल किताबें भी तौलकर लीजिए

सौजन्य से:- ETV Bharat

यूपी का एक ऐसा पुस्तक मेला जहां किलो के भाव में साहित्य, मोटिवेशनल किताबें भी तौलकर लीजिए

'वेबली बॉक्स' बुक फेयर का आज अंतिम दिन, युवाओं ने बढ़चढ़ कर खरीदी किताबें.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 26, 2026 at 12:09 PM IST

|Updated : August 26, 2026 at 12:31 PM IST

प्रयागराज : प्रयागराज को यूं ही साहित्य और प्रतियोगी परीक्षाओं का गढ़ नहीं कहा जाता. डिजिटल दौर में जहां रील्स और सोशल मीडिया का असर बढ़ा है, वहीं संगम नगरी के युवाओं का किताबों के प्रति लगाव आज भी जिंदा है. शहर में आयोजित 'वेबली बॉक्स' बुक फेयर इन दिनों छात्र-छात्राओं और पुस्तक प्रेमियों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है. वजह है किताबों की बिक्री का अनोखा तरीका यहां किताबें एमआरपी के बजाय प्रति किलो के भाव और खास कॉम्बो ऑफर्स पर बेची जा रही हैं. 21 से 26 तारीख तक चलने वाले इस मेले में हिंदी साहित्य से लेकर विदेशी क्लासिक्स और मोटिवेशनल किताबों को खरीदने के लिए युवाओं की भीड़ उमड़ रही है.

पुस्तक मेले के मैनेजर राजेश कुमार ने बताया कि यह आयोजन खास तौर पर उन पाठकों के लिए किया गया है जो कम बजट में बेहतरीन किताबें पढ़ना चाहते हैं. साधारण किताबें ₹400 प्रति किलो के हिसाब से तौलकर दी जा रही हैं. प्रीमियम श्रेणी की 3 किताबें ₹550 और 6 किताबें ₹1,000 में उपलब्ध हैं. हिंदी की चुनिंदा किताबों पर एमआरपी से 30% तक की छूट दी जा रही है.

राजेश कुमार के अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं के शहर प्रयागराज में हिंदी और अंग्रेजी दोनों वर्गों की किताबों की जबरदस्त मांग है. अंग्रेजी में जहां 'एटॉमिक हैबिट्स', 'द 48 लॉज ऑफ पावर' और 'द सीक्रेट' जैसी सेल्फ-हेल्प किताबें पसंद की जा रही हैं. हिंदी साहित्य में मुंशी प्रेमचंद, फणीश्वर नाथ 'रेणु' और शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की रचनाएं खूब बिक रही हैं.

मेले में पहुंचीं यूपीएससी अभ्यर्थी सोनी वर्मा ने बताया कि उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की ‘प्रतिज्ञा’, ‘नारी-जीवन की कहानियां’, राजेंद्र यादव की ‘सारा आकाश’ और डेल कार्नेगी की ‘लोक व्यवहार’ जैसी किताबें चुनी हैं. सोनी का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ साहित्य व्यक्तित्व को बेहतर बनाता है और यहां किताबें बेहद किफायती दरों पर मिल रही हैं.

बीएससी की छात्रा आयुषी मिश्रा हरिशंकर परसाई के व्यंग्य 'आवारा भीड़ के खतरे', भगवती चरण वर्मा के 'भूले बिसरे चित्र' और विनोद कुमार शुक्ल की रचनाएं खरीदते हुए दिखीं. आयुषी के मुताबिक परसाई समाज और राजनीति की विसंगतियों को जिस व्यंग्यात्मक ढंग से रखते हैं, वह आज के दौर में भी बेहद प्रासंगिक है.

पत्रकार और पुस्तक प्रेमी मधुसूदन ने अल्बर्ट कामू की 'द मिथ ऑफ सिसिफस' और अमृता प्रीतम की 'पिंजर' जैसी कालजयी कृतियां खरीदीं. उन्होंने बताया कि युवाओं में दास्तोवस्की, काफ्का और हिंदी के दिग्गज लेखकों के साथ-साथ भारतीय दर्शन से जुड़ी किताबों को लेकर भी गहरी उत्सुकता देखने को मिल रही है.

बीपीएससी की तैयारी कर रहे विशाल यादव ओशो और आचार्य प्रशांत के साहित्य की तलाश में मेले पहुंचे. विशाल का मानना है कि मोबाइल स्क्रीन से हटकर पन्ने पलटने की जो आदत है, उसे ऐसे किफायती आयोजनों से बड़ा संबल मिलता है.

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