'गजनवी भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना था', सीएम योगी आदित्यनाथ ने बताया, क्यों ठुकराया था पुजारियों का प्रस्ताव
Yogi Adityanath on Mahmud Ghaznavi: महमूद गजनवी के भारत पर आक्रमण को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने गजनवी को भारत की सनातन परंपरा पर हमला करने वाला बताया। गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्र…

सौजन्य से:- Navbharat Times
Yogi Adityanath on Mahmud Ghaznavi: महमूद गजनवी के भारत पर आक्रमण को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने गजनवी को भारत की सनातन परंपरा पर हमला करने वाला बताया।
गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के आक्रमण को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने गजनवी के आक्रमण का हवाला देते हुए गुरुवार को दावा किया कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य भारत की संपदा के साथ ही इसके बौद्धिक एवं सनातन विरासत को नष्ट करना था। सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर में भारतीय ज्ञान परंपरा पर एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि जब महमूद गजनवी सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त करने गया तो पुजारियों ने उसे मंदिर या प्रतिमा को नुकसान नहीं पहुंचाने को कहा और इसके बदले जितना चाहे उतना सोना एवं आभूषण ले लेने को कहा।
सीएम योगी ने कहा कि इस पर महमूद गजवी ने कहा, मैं यहां केवल लूटने नहीं आया हूं। जो कुछ भी मिलेगा, मैं उठा ले जाऊंगा। मेरा उद्देश्य भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आक्रांताओं का उद्देश्य केवल भारत की संपदा को लूटना नहीं था, बल्कि भारत का ज्ञान पूरी तरह से नष्ट करना था। उन्होंने कहा कि भारत को इसके ज्ञान की विरासत के कारण कभी विश्वगुरु के तौर पर जाना जाता था।
ज्ञान की विरासत का जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि भारत में सर्वोत्तम जलवायु, सबसे अधिक उपजाऊ भूमि और पर्याप्त जल संसाधन है, लेकिन प्राचीन दुनिया में इसकी पहचान क्या थी। हमें हमारी ज्ञान परंपरा के कारण विश्वगुरु कहा जाता था। ज्ञान की विरासत पर हमारा एकाधिकार था। मौजूदा समय के विकसित देशों की तुलना भारत के प्राचीन संस्थानों से करते हुए सीएम ने कहा कि आज के विकसित देशों का इतिहास केवल 400-500 साल पुराना है।
सीएम योगी ने कहा कि भारत में 2600 वर्षों पूर्व तक्षशिला और 1700-1800 वर्षों पूर्व नालंदा जैसे संस्थान थे। सीएम ने कहा कि हमने ज्ञान को साक्षरता या पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं कर रखा था। हमने कहा, विद्या सा विमुक्तये यानी ज्ञान वह है जो मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करे।
अंग्रेजी व्यवस्था के प्रभाव की बात
मुख्यमंत्री ने भारत की परंपरागत ज्ञान प्रणालियों पर अंग्रेजी व्यवस्था के प्रभाव को लेकर कहा कि अंग्रेजों ने भारत की अपनी बौद्धिकता और चिकित्सा परंपराओं के बारे में भ्रम पैदा किया। फलस्वरूप हम धीरे धीरे अपनी परंपराओं से दूर होते गए। उन्होंने आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी का हवाला देते हुए कहा कि हाल के वर्षों में इन्हें व्यापक पहचान मिली है।
सीएम योगी ने भारत के प्राचीन ज्ञान को लेकर अधिक अनुसंधान और संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को युवा पीढ़ियों का परिचय बौद्धिक विरासत से कराना चाहिए। आदित्यनाथ ने पाणिनी, पतंजलि, चाणक्य और नैमिषारण्य से जुड़ी ज्ञान परंपराओं का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने व्याकरण, अर्थशास्त्र, विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, संगीत, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान किया।
लेखक के बारे मेंराहुल पराशरराहुल पराशर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। वे नवभारत टाइम्स की यूपी-उत्तराखंड टीम में काम करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 22 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। राहुल पराशर ने अक्टूबर 2021 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने पिछले 4 वर्षों में यूपी विधानसभा चुनाव, यूपी निकाय चुनाव, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव, यूपी में एसआईआर प्रक्रिया जैसे बड़े घटनाक्रम का विस्तृत कवरेज किया है। राजनीति गतिविधियों से लेकर प्रशासनिक हलचल और क्राइम की घटनाओं पर उनका फोकस रहता है।
विशेषज्ञता- राजनीतिक खबरों का विश्लेषण, क्राइम की घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट, प्रशासनिक हलचल को लेकर इनसाइड स्टोरी, सरकार के फैसलों का आम लोगों पर असर का विश्लेषण।
पत्रकारिता अनुभव: अखबार और डिजिटल मीडिया में 22 साल से कार्यरत
राहुल पराशर ने साल 2004 में प्रभात खबर, पटना से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में जूनियर रिपोर्टर से लेकर प्रधान संवाददाता के पद पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा, राजद, जदयू और लोजपा जैसे दलों को कवर किया। उन्होंने शिक्षा विभाग की लंबे समय तक रिपोर्टिंग की। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है।
शिक्षा:
राहुल पराशर ने वर्ष 2004 में भारतीय विद्या भवन के पीके इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म का कोर्स किया है। मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर से आने वाले राहुल पराशर ने नेतरहाट, झारखंड से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से वर्ष 2002 में स्नातक की डिग्री हासिल की है।... और पढ़ें
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