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'यूपी में घुसते ही मजा आ गया', 4.5 करोड़ कांवड़ियों ने UP पुलिस को सराहा, खाकी ने ऐसे संभाली भोलों की फौज

उत्तर प्रदेश में सावन माह के पहले दिन 30 जुलाई को शुरू हुई कांवड़ यात्रा का समापन 11 अगस्त को हो गया। कुल 12 दिन चली इस यात्रा में करीब साढ़े चार करोड़ कांवड़ियों ने भाग लिया। विशाल जनभागीदारी वाले इस आयोजन के दौरान यूपी…

Navbharat Times के अनुसार12 अगस्त 2026 को 06:18 am बजे
'यूपी में घुसते ही मजा आ गया', 4.5 करोड़ कांवड़ियों ने UP पुलिस को सराहा, खाकी ने ऐसे संभाली भोलों की फौज

सौजन्य से:- Navbharat Times

उत्तर प्रदेश में सावन माह के पहले दिन 30 जुलाई को शुरू हुई कांवड़ यात्रा का समापन 11 अगस्त को हो गया। कुल 12 दिन चली इस यात्रा में करीब साढ़े चार करोड़ कांवड़ियों ने भाग लिया। विशाल जनभागीदारी वाले इस आयोजन के दौरान यूपी पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सावन माह में 30 जुलाई से 11 अगस्त तक 12 दिन तक सड़कों पर कांवड़ियों का सैलाब देखने को मिला। मुख्य रूप से यूपी और उत्तराखंड के बीच कांवड़ियों ने यात्राएं कीं। अनुमान है कि इस बार करीब 4.5 करोड़ कांवड़ियों ने इस पवित्र पदयात्रा में भाग लिया। यह महाकुंभ नहीं था, लेकिन कम अवधि का यह बड़ा आयोजन उससे कमतर भी नहीं था। यूपी और उत्तराखंड को जोड़ने वाली सड़कें कांवड़ियों से पटी रहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के सामने इस यात्रा को शांति के साथ संपन्न कराने की चुनौती थी, जिसे पूरी करने में वह सफल रही। तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ कांवड़ियों की देखभाल के लिए यूपी का प्रशासन हर समय मुस्तैद रहा।

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा सावन महीने के पहले दिन 30 जुलाई को शुरू हुई थी। श्रावण शिवरात्रि पर 11 अगस्त को भगवान शंकर के जलाभिषेक के साथ यह संपन्न हो गई। समापन दिवस पर शिव भक्तों ने हरिद्वार, गंगोत्री सहित गंगा के अन्य घाटों से लाया गया जल शिवालयों में चढ़ाया।

हरिद्वार पहुंचे 4.8 करोड़ श्रद्धालु

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चली कांवड़ यात्रा में इस साल करीब 4.5 करोड़ कांवड़िए शामिल हुए। इस दौरान हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का कुल आंकड़ा रिकॉर्ड 4.8 करोड़ तक पहुंच गया। इस धार्मिक यात्रा के दौरान मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद और सहारनपुर जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली।

यात्रा मार्गों पर सुरक्षा बलों के 60 हजार जवान तैनात रहे

कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन पूरे समय मुस्तैद रहा। पुलिस और प्रशासन ने कांवड़ियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य की देखभाल और रूट डायवर्जन सहित यात्रा से जुड़े अलग-अलग मोर्चों पर तगड़ी व्यवस्था की थी। कांवड़ यात्रा मार्गों पर 60,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा बल के जवान तैनात किए गए थे। इनमें यूपी पुलिस, पीएसी, सीआरपीएफ, एटीएस के अलावा एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान भी शामिल थे।

हजारों कैमरों से चप्पे-चप्पे पर रखी गई नजर

प्रशासन ने यात्रा के दौरान निगरानी के लिए तकनीक का भी उपयोग किया। इस दौरान सभी मार्गों के सभी संवेदनशील स्थानों और चौराहों पर 30,000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसके अतिरिक्त ड्रोन से भी निगरानी की गई। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए एटीएस कमांडो और विशेष सतर्कता बल तैनात रहे। मेरठ, वाराणसी, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर सहित अन्य प्रमुख कांवड़ यात्रा मार्गों पर स्थानीय पुलिस के साथ सुरक्षा बलों की अतिरिक्त कंपनियां तैनात रहीं।

असामाजिक तत्वों पर सीएम योगी का कड़ा रुख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ सहित अन्य क्षेत्रों में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की थी। सीएम योगी ने कांवड़ यात्रा में अराजक तत्वों के शामिल होने को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति तय की थी। साथ ही अराजकता, उपद्रव या अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने और सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने के कड़े निर्देश दिए थे। यात्रा मार्गों पर पड़ने वाली मांस की दुकानों को बंद रखने का आदेश दिया गया था। इसके साथ दुकानदारों के लिए नेम प्लेट लगाने और अन्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया था। यूपी सरकार ने डीजे की आवाज और कांवड़ की ऊंचाई तय मानकों की सीमा में रखने की सलाह दी थी, ताकि किसी को परेशानी न हो। हर जिले में सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और यातायात के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे।

कांवडियों के स्वास्थ्य का भी रखा गया ध्यान

प्रशासन ने कांवड़ यात्रा के छह प्रमुख मार्गों पर पहली बार 18 बाइक एंबुलेंस तैनात की थीं। यह व्यवस्था जरूरत पड़ने पर कांवड़ियों के त्वरित उपचार के लिए की गई थी। इसके अलावा मार्गों पर 32 स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए थे। सामान्य एंबुलेंसों के अलावा बाइक एंबुलेंसें इसलिए तैनात की गई थीं ताकि वे संकरे या भीड़ भरे रास्तों से गुजरकर अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकें।

कांवड़ियों के कई मार्ग, सब पर पुख्ता सुरक्षा

कांवड़ियों ने यात्रा के लिए कई रास्तों का इस्तेमाल किया। प्रशासन ने सभी रास्तों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। कांवड़ियों का प्रमुख मार्ग नेशनल हाईवे -34 था। इस मार्ग से कांवड़िए हरिद्वार से रुड़की, मुजफ्फरनगर, खतौली, मेरठ, मोदीनगर और गाजियाबाद होते हुए दिल्ली व एनसीआर की ओर आवागमन करते रहे। इसके अलावा उन्होंने चौधरी चरण सिंह पटरी कांवड़ मार्ग मुजफ्फरनगर और मेरठ क्षेत्र में मुख्य हाईवे के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया। बदायूं-बरेली रोड के जरिए कांवड़िए कछला घाट से गंगाजल लेकर बदायूं, भमोरा, देवचरा, रामगंगा और बरेली के चौपुला व लाल फाटक होते हुए विभिन्न मंदिरों तक आवागमन करते रहे। हरिद्वार से पुरा महादेव (बागपत) मार्ग से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्थानीय शिव भक्त गढ़, हरिद्वार से बागपत के पुरा महादेव मंदिर तक आवागमन करते रहे।

कहीं-कहीं बनीं विवाद का स्थितियां

उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस और कांवड़ियों के बीच विवाद भी हुए। डीजे की ऊंचाई निर्धारित सीमा से अधिक होने, शोरगुल अधिक किए जाने और कांवड़ियों के हथियार लेकर चलने जैसे मामलों को लेकर विवाद की स्थितियां बनीं। मुजफ्फरनगर में पुलिस ने लाठी, डंडे और फरसे लेकर चल रहे बाइक सवार युवकों पर कार्रवाई की। पुलिस ने चार दर्जन से अधिक डंडे और तीन फरसे बरामद किए। उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

यूपी सरकार चुनौती से निपटने में हुई कामयाब

उत्तर प्रदेश में 12 दिन में करीब 4.5 करोड़ शिव भक्त सड़कों पर से गुजरे। यह एक विशाल जन समागम था जिसका प्रबंधन बहुत बड़ी चुनौती था। इस धार्मिक यात्रा के दौरान साम्प्रदायिक तनाव बनने की आशंका सबसे अधिक थी। हालांकि यूपी के तेजतर्रार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस यात्रा से पहले ही ऐसी व्यवस्थाएं कर दी थीं कि कहीं कोई अशांति फैलने की संभावना नहीं बची। कांवड़ यात्रा की सफलता के पीछे स्पष्ट दिशानिर्देश और पुख्ता प्रशासनिक व्यवस्था है।

लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। वे जून 2025 से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े हैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चलाते हैं। वे 31 साल से पत्रकारिता कर रहें हैं। इस लंबी अवधि में उन्होंने कई वर्षों तक अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। उन्होंने कई दिग्गज कलाकारों, राजनीतिज्ञों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार किए हैं।

सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। वे इस दौरान रिपोर्टिंग के अलावा विभिन्न डेस्कों पर अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं।

सूर्यकांत पाठक विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग और समाचार लेखन करते रहे हैं। वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। वे एक अच्छे 'स्टोरी टेलर' हैं और उनके लेखन में दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है।

पत्रकारिता अनुभव

सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो- सागर में कैजुअल एनाउंसर/कंपेयर के रूप में सन 1993 में की थी। सन 1995 में दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सागर ब्यूरो में रिपोर्टर नियुक्त हुए। बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। सन 1997 में प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक नईदुनिया के इंदौर संस्करण में रिपोर्टर/सब एडिटर का दायित्व संभाला। इसके बाद सन 2003 में अमर उजाला- जम्मू में सीनियर रिपोर्टर नियुक्त हुए। सन 2005 में उन्होंने ईटीवी ज्वाइन किया और उन्हें जबलपुर में पूर्वी मध्य प्रदेश के ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया।

सन 2006 में दैनिक भास्कर-भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में फिर से प्रिंट मीडिया में काम शुरू किया। सन 2009 में पीपुल्स समाचार - भोपाल में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने सन 2010 में लोकमत समाचार-औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। उन्होंने जुलाई 2015 में एनडीटीवी इंडिया (डिजिटल)-नई दिल्ली में न्यूज एडिटर के रूप में ज्वाइन किया और 2017 में डिप्टी एडिटर बने। जनवरी 2025 में वे एनडीटीवी में सेवानिवृत्त हुए।

सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। उन्होंने'बच्चों पर केबिल टेलिविजन का असर' विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है।

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बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।... और पढ़ें

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