यूपी में कांग्रेस की खेवनहार रहीं महिलाएं; जब-जब सौंपी कमान, बढ़ा पार्टी का सम्मान
यूपी में कांग्रेस की खेवनहार रहीं महिलाएं; जब-जब सौंपी कमान, बढ़ा पार्टी का सम्मान मोहसिना किदवई से लेकर रीता बहुगुणा जोशी तक, हर महिला प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल में मिली सफलता, पढ़िए अखिल पांडेय की रिपोर्ट By ETV Bhara…

सौजन्य से:- etvbharat.com
यूपी में कांग्रेस की खेवनहार रहीं महिलाएं; जब-जब सौंपी कमान, बढ़ा पार्टी का सम्मान
मोहसिना किदवई से लेकर रीता बहुगुणा जोशी तक, हर महिला प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल में मिली सफलता, पढ़िए अखिल पांडेय की रिपोर्ट
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : October 6, 2026 at 4:25 PM IST
लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 करीब हैं, और इसी बीच कांग्रेस ने बड़ा बदलवा करते हुए आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है. उन्हीं के नेतृत्व में 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा. आजादी के बाद से अब तक के हुए विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो पार्टी ने 4 बार महिलाओं को प्रदेश नेतृत्व की कमान दी है. जब भी ऐसा किया कांग्रेस को फायदा ही पहुंचा. महिलाएं पार्टी के लिए भाग्यशाली साबित हुईं. सबसे ज्यादा लाभ कांग्रेस रीता बहुगुणा जोशी के कार्यकाल में मिला, जब 21 लोकसभा सीटें जीतीं. हालांकि बाद में रीता भाजपा में शामिल हो गईं. अब देखना होगा कि पूर्व की महिला अध्यक्षों की तरह क्या आराधना मिश्रा मोना भी कांग्रेस के लिए लकी साबित होंगी? यूपी में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति और महिला नेतृत्व में मिली सफलता पर पढ़िए रिपोर्ट...
यूपी विधानसभा चुनाव जब काफी करीब आ गया तब कांग्रेस ने देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ा फैसला ले लिया. पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा. अब विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें हटाकर यूपी का नेतृत्व एक महिला को सौंप दिया. देखें तो महिलाओं के हाथ कमान सौंपने से हर बार पार्टी की स्थिति बेहतर ही हुई है. इस बार भी पार्टी को उम्मीद है कि आराधना मिश्रा मोना के नेतृत्व में पार्टी उत्तर प्रदेश में वही सफलता दोहरा सकती है. आराधना लगातार तीन बार विधायक रही हैं. रामपुर खास सीट खास तौर पर उनके ही नाम हो गई. अब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में जहां इसी सीट पर एक बार फिर आराधना मिश्रा उम्मीदवार होंगी, वहीं उनके कंधों पर यूपी में कांग्रेस को भी जिताने का पूरा भार होगा. अब यह देखने वाली बात जरूर होगी कि अपनी पूर्व की महिला नेत्रियों की तरह आराधना मिश्रा पंजे को यूपी में कितना मजबूत कर पाती हैं.
आजादी के 30 साल बाद मोहसिना बनीं पहली महिला अध्यक्ष
कांग्रेस पार्टी ने भारत की स्वतंत्रता के 30 साल बाद पहली बार देश के सबसे बड़े सूबे की कमान एक महिला के हाथ सौंपी थी. वह साल था 1976. मथुरा में हुई बैठक के बाद उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मोहसिना किदवई से दिल्ली में इंदिरा गांधी के साथ आयोजित बैठक में शामिल होने के लिए चलने को कहा. बीच रास्ते में उन्हें जानकारी दी कि यूपी कांग्रेस का अध्यक्ष आपको बनाया गया है. उस मुलाकात के दौरान इंदिरा गांधी ने मोहसिना ने कहा था कि उन्हें उन पर पूरा भरोसा है, इसलिए यूपी में अपना काम शुरू करो. इसके बाद मोहसिना किदवई ने यूपी में अपने कार्यकाल की शुरुआत की. यूपी विधानसभा उस समय भंग हुई, जिसके बाद जून 1977 में नए चुनाव का एलान किया गया. मोहसिना किदवई ने कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते पूरे प्रदेश का दौरा किया. पार्टी के लिए धन की कमी की उनके सामने चुनौती थी, इसलिए उन्होंने प्रत्याशियों की सहायता के लिए अपनी 90000 रुपए की एफडी तुड़वा दी थी. कांग्रेस ने उस चुनाव में यूपी में 48 सीटें जीती थीं.
इंदिरा के खिलाफ लहर में भी बुलंद किया परचम
कांग्रेस के सितारे उन दिनों गर्दिश में थे, लेकिन मोहसिना किदवई ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसकी उम्मीद पार्टी को भी नहीं थी. उन्होंने बाराबंकी से भी चुनाव जीत और मेरठ से ऐसी सीट पर भी विजय श्री हासिल की. साल 1977 में कांग्रेस की हार के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री रामनरेश यादव की लोकसभा सीट खाली हुई तो इस सीट से मोहसिना किदवई ने लोकसभा चुनाव जीतकर कांग्रेस की इस सीट से जीत की शुरुआत की थी. उनकी जीत इसलिए भी खासी मायने रखती थी, क्योंकि देश भर में उस समय इंदिरा गांधी के विरोध में लहर चल रही थी. तमाम सीटें कांग्रेस पार्टी हार गई थी लेकिन आजमगढ़ जैसी लोकसभा सीट पर मोहसिना किदवई ने कांग्रेस पार्टी का झंडा बुलंद कर दिया.
राजेंद्र कुमारी बाजपेई बनीं दूसरी महिला अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की दूसरी महिला अध्यक्ष राजेंद्र कुमारी बाजपेई बनीं. उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कई मंत्रालय संभाले. साल 1980 में सीतापुर सीट से लोकसभा चुनाव जीता और फिर लगातार 1984 और 1989 के लोकसभा चुनाव में भी ये सिलसिला जारी रहा. 1993 में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश का जिम्मा सौंपा. राजेंद्र कुमारी बाजपेई ने प्रदेश का दौरा शुरू किया. कांग्रेस यूपी में बेहतरी की तरफ बढ़ रही थी तभी आलाकमान ने उन्हें झटका दे दिया. हरदोई दौरे पर गईं राजेंद्र कुमारी बाजपेई को खुद के अध्यक्ष पद से हटने की जानकारी हो गई. हटाया इसलिए गया कि दलितों का वोट हासिल हो सके. महावीर प्रसाद को अध्यक्ष बना दिया गया, लेकिन वोट हासिल नहीं हो सका.
रीता बहुगुणा जोशी ने कर दिया करिश्मा
कांग्रेस पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अगर महिला नेत्री की बात करें तो सर्वाधिक सफल रीता बहुगुणा जोशी रहीं. वर्ष 2007 में रीता को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश का कार्यभार सौंपा. पांच साल तक वे कांग्रेस पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रहीं. उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन किया. बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीम मायावती के सरकार के दौरान उनके नेतृत्व में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने खूब प्रदर्शन किया. 2011 में जब राहुल गांधी को किसानों के समर्थन में धरना देने के लिए गिरफ्तार किया गया, तब रीता जोशी ने प्रदेश भर में सड़कों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था. उनके समय 2009 का लोकसभा चुनाव हुआ तो कांग्रेस पार्टी ने 21 लोकसभा सीटें अकेले दम पर जीती थीं. हालांकि, 2012 का यूपी विधानसभा चुनाव हुआ तो 2009 के लोकसभा चुनाव जैसा इतिहास कांग्रेस नहीं दोहरा पाई. रीता बहुगुणा जोशी ने लखनऊ की कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और भारतीय जनता पार्टी को हराकर कांग्रेस का परचम लहरा दिया, लेकिन यूपी में कांग्रेस की हार से रीता बहुगुणा जोशी काफी चिंतित हुईं और उन्होंने इसकी जिम्मेदारी ली. रीता जोशी ने चार साल बाद भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली.
चौथी महिला अध्यक्ष बनीं आराधना मिश्रा
कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी अब तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा "मोना" के कंधों पर दी है. 2024 के लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा, जिसके चलते 2019 लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट जीतने वाली कांग्रेस छ्ह सांसद बनाने में सफल हुई. 2027 के विधानसभा चुनाव तक अगर समाजवादी पार्टी से कांग्रेस का गठबंधन जारी रहता है और सीटों का बंटवारा सही तरीके से होता है तो 2022 में सिर्फ दो सीटें लाने वाली कांग्रेस इस बार बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. पार्टी को पूरी उम्मीद है कि कांग्रेस पिछली हर हार का बदला लेगी, लेकिन अभी लोकसभा का गठबंधन विधानसभा तक जारी रहेगा या फिर कांग्रेस पार्टी को अकेले दम चुनाव लड़ना पड़ेगा, ये तय नहीं हो पाया है. अगर कांग्रेस पार्टी अकेले चुनाव लड़ती है तो आराधना मिश्रा की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी. अपने बलबूते 399 सीटों पर 2022 का चुनाव लड़कर देख चुकी कांग्रेस का रिजल्ट काफी खराब रहा है. सिर्फ दो सीटें ही आई थीं और मत प्रतिशत भी 2% ही रह गया था.
क्या कहते हैं सपा प्रवक्ता
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता हैदर अब्बास का कहना है कि यह कांग्रेस पार्टी का अपना निर्णय है. मैं प्रदेश अध्यक्ष बनने पर आराधना मिश्रा को बधाई देता हूं. जहां तक बात समाजवादी पार्टी की है तो हम मेहनत पर विश्वास करते हैं. कांग्रेस पार्टी के कई नेता भी यह बयान दे चुके हैं. वे चाहते हैं कि हर हाल में अखिलेश यादव को इस बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाना है. किसी भी कीमत पर भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से हटाना है.
क्या कहते हैं भाजपा के मुख्य प्रवक्ता
भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह का कहना है कि कांग्रेस ने इससे पहले भी कई तरह के प्रयोग किए, लेकिन आशातीत सफलता कभी नहीं मिली. इस बार भी उन्होंने चुनाव के ठीक पहले आराधना मिश्रा को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, इससे भी चुनाव में कहीं सफलता मिलती नजर नहीं आती है. हकीकत यही है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी अगर समाजवादी पार्टी के कंधे का इस्तेमाल न करे तो अपनी परंपरागत सीटें भी हार जाए. कांग्रेस ने चुनाव से ठीक पहले आराधना मिश्रा को अध्यक्ष बनाकर उन्हें बलि का बकरा बनाया है. कांग्रेस पार्टी की एक और नेता यहां आई थीं. नारा दिया था लड़की हूं लड़ सकती हूं, कहां गईं? पूरा गांधी खानदान, वाड्रा खानदान लग गया था लेकिन अपनी सीट नहीं जीत पाए थे. कांग्रेस अपनी बीमारी का पता नहीं लगा पा रही है. जिससे उसका ठीक से इलाज कर सके. जनता इस बार कांग्रेस की खुराक और बढ़ाने वाली है. अभी तक कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में दो विधानसभा सीटें थीं, लेकिन इस बार शून्य रह जाएंगी.
क्या कहती हैं कांग्रेस की मीडिया वाइस चेयरपर्सन
कांग्रेस पार्टी की मीडिया वाइस चेयरपर्सन प्रियंका गुप्ता का कहना है कि इतिहास गवाह रहा है, जब-जब कांग्रेस पार्टी ने महिलाओं को नेतृत्व दिया, तब कांग्रेस पार्टी की स्थिति बेहतर हुई. चाहे नेतृत्व मोहसिना किदवई के हाथ रहा हो या फिर राजेंद्र कुमारी बाजपेई के हाथ. रीता बहुगुणा जोशी का अध्यक्षीय कार्यकाल रहा हो या अब आराधना मिश्रा मोना का. मैं समझती हूं कांग्रेस पार्टी ने महिलाओं को नेतृत्व देकर हमेशा ही उनके साथ न्याय किया है और महिलाओं ने भी अपनी जिम्मेदारी का बेहतर तरीके से निर्वहन किया है. अब कांग्रेस ने आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है तो निश्चित तौर पर जैसा उनका रिकॉर्ड है कि वह तीन बार से लगातार विधायक हैं. उनके पिता लगातार नौ बार विधायक रहे तो निश्चित तौर पर कांग्रेस को इसका फायदा मिलेगा. 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी बहुत अच्छा प्रदर्शन करेगी. लगातार लोग कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं. हमारा कुनबा लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इस बार कांग्रेस पार्टी का स्वर्णिम काल आने वाला है.
क्या कहती हैं प्रदेश अध्यक्ष
"ईटीवी भारत" ने जब कांग्रेस पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा से महिला अध्यक्षों के कार्यकाल के दौरान पार्टी की परफॉर्मेंस को लेकर सवाल किया तो उनका यही कहना है कि हम निश्चित तौर पर 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने जा रहे हैं.
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