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CM योगी की मौजूदगी में बीजेपी के आठों प्रत्याशियों का हुआ नामांकन, सपा से तीसरा नाम न आने से साफ हुई तस्वीर

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए मंगलवार को बीजेपी के सभी 8 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए मंगलवार को ब…

Navbharat Times के अनुसार6 अक्टूबर 2026 को 12:04 pm बजे
CM योगी की मौजूदगी में बीजेपी के आठों प्रत्याशियों का हुआ नामांकन, सपा से तीसरा नाम न आने से साफ हुई तस्वीर

सौजन्य से:- Navbharat Times

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए मंगलवार को बीजेपी के सभी 8 प्रत्याशियों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया।

हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए मंगलवार को बीजेपी के सभी 8 प्रत्याशियों ने विधानसभा स्थित निर्वाचन अधिकारी के कक्ष में पहुंचकर अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। आपको बता दें कि नामांकन के आखिरी दिन आयोजित इस प्रक्रिया के दौरान उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक विशेष रूप से उपस्थित रहे।

नामांकन कक्ष में बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत और बीजेपी के सीनियर नेता गोपीकृष्ण पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैर छूकर जीत का आशीर्वाद लिया। पर्चा दाखिले की शुरुआत में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने सबसे पहले अपना नामांकन पत्र प्रस्तुत किया। वहीं, इस प्रक्रिया के अंत में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार ने अपना पर्चा दाखिल किया। नामांकन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भाजपा के सभी आठों प्रत्याशी एक साथ विक्ट्री साइन दिखाते हुए विधान भवन से बाहर निकले।

भाजपा के 8 और सपा के 2 प्रत्याशी

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की कुल 10 रिक्त सीटों पर हो रहे इस चुनाव में अब किसी भी प्रकार के मतदान की संभावना समाप्त हो गई है और सभी प्रत्याशियों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। इससे पहले सपा की ओर से प्रोफेसर रामगोपाल यादव और उद्योगपति धनंजय परिमल नाथवानी पहले ही अपना नामांकन पत्र जमा कर चुके हैं।

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के अनुसार सपा के पास तीसरी सीट जीतने के लिए पर्याप्त आंकड़े नहीं थे। हालांकि तीसरे उम्मीदवार को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है लेकिन सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यह स्पष्ट करते हुए तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारा कि अब उनकी निगाह राज्यसभा की तीन सीटों पर नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा की सभी 403 सीटों पर केंद्रित है। सपा की ओर से 11वां उम्मीदवार मैदान में न उतारे जाने के कारण भाजपा के 8 और सपा के 2 प्रत्याशियों की जीत पूरी तरह पक्की हो चुकी है।

किसी पुराने सांसद को रिपीट नहीं किया

भाजपा के इस राज्यसभा टिकट वितरण की सबसे खास बात ये रही बीजेपी ने अपने किसी भी मौजूदा राज्यसभा सांसद को दोबारा मौका न देते हुए संगठन और जमीन से जुड़े नए चेहरों पर सियासी दांव लगाया है। बताते चलें कि घोषित उम्मीदवारों में प्रदेश की योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल, पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर, गोपीकृष्ण पांडेय, पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत, प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।

जातीय समीकरण की यदि बात करें तो बीजेपी ने 3 ओबीसी, 2 दलित, 2 ब्राह्मण और 1 क्षत्रिय चेहरे को मैदान में उतारकर सामाजिक समीकरणों को मजबूती दी है। राधाकांत ओझा पूर्व मंत्री शिवाकांत ओझा के छोटे भाई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक ने सभी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं देते हुए इसे ऐतिहासिक विजय का मार्ग बताया है।

नामांकन बना शक्ति प्रदर्शन

नामांकन के दौरान सत्ताधारी भाजपा ने अपनी पूरी संगठनात्मक और राजनीतिक एकजुटता का प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सान्निध्य में हुए इस नामांकन कार्यक्रम में योगी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री सुरेश खन्ना, राकेश सचान, आशीष पटेल, डॉ. संजय निषाद, कपिलदेव अग्रवाल, जेपीएस राठौर, दिनेश प्रताप सिंह, गिरीश चंद्र यादव, ब्रजेश सिंह, सतीश चंद्र शर्मा, रजनी तिवारी और बलदेव सिंह औलख समेत पार्टी के कई प्रमुख पदाधिकारी और विधायक मौजूद रहे। नामांकन पत्रों की जांच के बाद औपचारिक रूप से सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

लेखक के बारे मेंपवन नौटियालपवन नौटियाल नवभारत टाइम्स में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सेक्शन के लिए बतौर कंसलटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का व्यापक पत्रकारीय अनुभव है। मूल रूप से उत्तराखंड (उत्तरकाशी) के रहने वाले पवन को दोनों राज्यों की राजनीति, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, क्राइम और यूटिलिटी खबरों की गहरी समझ है।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 2012 में देहरादून से एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के साथ की, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग और कई एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए। उन्होंने 2013 की भीषण केदारनाथ आपदा की भी क्रेडिबल ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इसके बाद, उन्होंने 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में 5 वर्षों तक डेस्क और फील्ड की दोहरी जिम्मेदारी संभाली। डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए उन्होंने वनइंडिया-डेलीहंट के साथ करीब 5 साल काम किया, जहां उन्होंने उत्तरकाशी के ऐतिहासिक सिलक्यारा टनल हादसे और धराली आपदा जैसी बड़ी घटनाओं को मौके पर जाकर कवर किया। दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले पवन विज्ञान के छात्र रहे हैं, जिससे उनकी खबरों में तार्किक और डेटा-आधारित सटीकता दिखती है।मुख्य विशेषज्ञता (Areas of Expertise)क्षेत्रीय कवरेज: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति, समसामयिक मुद्दे और सामाजिक सरोकार।बीट्स: पॉलिटिकल एनालिसिस, क्राइम, हेल्थ, यूटिलिटी न्यूज और ग्राउंड डिजास्टर रिपोर्टिंग।अनुभव: 14+ वर्ष (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)।पेशेवर यात्रा (Professional Experience)करियर की शुरुआत (2012): देहरादून में न्यूज चैनल से शुरुआत; उत्तराखंड विधानसभा चुनाव और केदारनाथ आपदा (2013) की लाइव कवरेज। 'लोकस्वामी' मैगजीन के लिए अहम कवर स्टोरीज।प्रिंट मीडिया (5 वर्ष): 'दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट' में बतौर सीनियर सब-एडिटर/रिपोर्टर डेस्क और फील्ड रिपोर्टर के तौर पर काम।डिजिटल मीडिया (5 वर्ष): 'वनइंडिया-डेलीहंट' में यूपी-उत्तराखंड के चुनाव और बड़ी घटनाओं की कमान। उत्तरकाशी सिलक्यारा टनल रेस्क्यू और धराली आपदा की ग्राउंड रिपोर्टिंग।शिक्षा और क्रेडेंशियल (Education & Credentials)पोस्ट ग्रेजुएशन: मास कम्युनिकेशन (नई दिल्ली)।ग्रेजुएशन: साइंस स्ट्रीम (जो उनकी खबरों को एक विश्लेषणात्मक और सटीक दृष्टिकोण देता है)।स्थानीय जुड़ाव: मूल निवासी उत्तरकाशी (उत्तराखंड), जिससे उन्हें पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और राजनीतिक परिस्थितियों की स्वाभाविक और प्रामाणिक समझ है।... और पढ़ें

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